महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के नामांतरण और ग्राम पंचायतों से रोजगार देने के अधिकार छीने जाने के विरोध में कांग्रेस पार्टी ने सोमवार को जोरदार प्रदर्शन किया। राष्ट्रव्यापी आवाहन के तहत “मनरेगा बचाओ संग्राम” कार्यक्रम के अंतर्गत जिला कांग्रेस कमेटी के तत्वावधान में विकास मार्केट स्थित गांधी स्मारक पर एक दिवसीय उपवास धरना आयोजित किया गया। इस दौरान केंद्र की मोदी सरकार की नीतियों को गांव और गरीब विरोधी बताते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराया गया।
धरना स्थल पर बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता और सहयोगी जुटे। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिला कांग्रेस अध्यक्ष मुकेश धनगर ने कहा कि मनरेगा केवल एक योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण गरीबों के लिए रोजगार का अधिकार है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार मनरेगा का नाम बदलकर और ग्राम पंचायतों की भूमिका सीमित कर इसकी मूल भावना को कमजोर कर रही है। श्री धनगर ने बताया कि मनरेगा बचाओ अभियान के तहत मथुरा जनपद में गांव, ब्लॉक, तहसील और स्थानीय निकाय स्तर पर वार्ड सभाएं और सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि जन जागरण अभियान का पहला चरण 31 जनवरी से 6 फरवरी तक चलेगा, जिसका समापन जिला मुख्यालय पर विशाल धरने के साथ होगा। जिलाध्यक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि पहले मनरेगा के वित्त पोषण की मुख्य जिम्मेदारी केंद्र सरकार की थी, लेकिन अब इसका बोझ राज्यों पर डाला जा रहा है। जबकि अधिकांश राज्य पहले से ही वित्तीय संकट से जूझ रहे हैं, ऐसे में ग्रामीणों को जरूरत के अनुसार रोजगार मिलना मुश्किल हो जाएगा।
कार्यक्रम का संचालन करते हुए जिला कांग्रेस महामंत्री वैद्य मनोज गौड़ ने मनरेगा से महात्मा गांधी का नाम हटाने को भाजपा की “गोडसेवादी और सांप्रदायिक सोच” करार दिया। उन्होंने कहा कि यह कदम जनता को शिक्षा और सूचना के अधिकार से वंचित करने की उसी श्रृंखला का हिस्सा है।
धरने में शिवदत्त चतुर्वेदी, अप्रतिम सक्सेना, हाशिम हुमेर, करन निषाद, रूपा लवानिया, रवि वाल्मीकि, ललिता देवी, मोनू निषाद, अशोक निषाद, बलवीर सिंह, रमेश कश्यप, बनी सिंह, अशोक श्रीवास्तव, विजय लोधी, मुकेश तरसी, कंचन सिंह, लक्ष्मी नारायण और सतपाल सहित कई कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद रहे।