ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने की दिशा में केंद्र सरकार का विकसित भारत रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) वीबी-जी राम जी अधिनियम 2025 एक ऐतिहासिक और ‘गेम चेंजर’ कदम साबित होगा। यह अधिनियम ग्रामीण श्रमिकों के लिए पहली बार रोजगार को कानूनी अधिकार के रूप में सुनिश्चित करता है और रोजगार सुरक्षा को नई ऊंचाई देता है।
कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित पत्रकार वार्ता में प्रभारी मंत्री संदीप सिंह ने कहा कि यह योजना ग्रामीण श्रमिकों के लिए “लाइफ लाइन” है। उन्होंने बताया कि अब 100 दिनों की जगह 125 दिन की रोजगार गारंटी दी जाएगी, जबकि अतिरिक्त प्रावधानों के तहत 185 दिनों तक काम उपलब्ध कराने का मार्ग प्रशस्त किया गया है। मंत्री ने कहा कि अब तक ग्रामीण क्षेत्रों में औसतन 50 दिन ही रोजगार मिल पाता था, लेकिन नए अधिनियम से यह स्थिति पूरी तरह बदलेगी।
उन्होंने बताया कि यदि समय पर काम उपलब्ध नहीं कराया गया तो बेरोजगारी भत्ता स्वतः श्रमिक के खाते में जाएगा। साथ ही मजदूरी भुगतान में देरी होने पर ब्याज सहित भुगतान अनिवार्य किया गया है। मजदूरी भुगतान के लिए 7 दिन की समय-सीमा तय की गई है, जिससे श्रमिकों को समय पर मेहनताना मिल सके।
अधिनियम के तहत योजना निर्माण का अधिकार ग्राम स्तर पर होगा और कार्यों का चयन ग्राम सभा में किया जाएगा। सभी कार्य विकसित भारत राष्ट्रीय ग्रामीण अवसंरचना स्टैक पर दर्ज होंगे। एआई आधारित जीपीएस ट्रैकिंग से उपस्थिति और कार्य प्रगति की निगरानी की जाएगी, जिससे फर्जी जॉब कार्ड, बिचौलियों और ठेकेदार प्रथा पर प्रभावी रोक लगेगी। अनियमितता पाए जाने पर संबंधित अधिकारी की जवाबदेही तय की जाएगी।
कृषि कार्य प्रभावित न हों, इसके लिए बुवाई और कटाई के दौरान 60 दिनों की विशेष अवधि तय करने का अधिकार राज्य सरकारों को दिया गया है। प्रभारी मंत्री ने स्पष्ट किया कि मनरेगा के सभी कार्य सुरक्षित हैं और वे निर्बाध रूप से जारी रहेंगे।
पत्रकार वार्ता में राज्यसभा सांसद तेजवीर सिंह, विधायक पूरन प्रकाश, ठा. मेघश्याम सिंह, महापौर विनोद अग्रवाल, महानगर अध्यक्ष राजू यादव, पूर्व नगर अध्यक्ष संजय शर्मा, महानगर मीडिया प्रभारी श्याम शर्मा, अमन ठाकुर, जिलाधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह, अपर जिलाधिकारी (वित्त) पंकज वर्मा सहित कई जनप्रतिनिधि और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।