जागरण टुडे,कासगंज।
न्यायालय के आदेश की अवहेलना करना सदर कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक प्रवेश राणा को महंगा पड़ गया। न्यायालय ने गंभीर रुख अपनाते हुए उनके विरुद्ध प्रकीर्ण वाद दर्ज कर उन्हें न्यायालय में तलब करने के निर्देश दिए हैं। यह कार्रवाई न्यायालय के स्पष्ट आदेश के बावजूद वाहन न छोड़े जाने के मामले में की गई है।
वरिष्ठ अधिवक्ता केशव मिश्रा ने बताया कि स्कॉर्पियो वाहन संख्या UP 87 Z 7772, जो कि सोनम पत्नी संदीप पांडेय के नाम पंजीकृत है, मुकदमा संख्या 12205/2025 में न्यायालय द्वारा पाबंद किया गया था। मामले की सुनवाई के दौरान न्यायालय ने दिनांक 12 दिसंबर 2025 को उक्त वाहन को छोड़ने के स्पष्ट आदेश पारित किए थे।
अधिवक्ता के अनुसार, न्यायालय के आदेश की प्रति उपलब्ध कराए जाने और बार-बार अनुरोध किए जाने के बावजूद सदर कोतवाल द्वारा वाहन को नहीं छोड़ा गया। आरोप है कि जब वाहन मुक्त किए जाने की बात कही गई तो कोतवाल ने किसी भी कीमत पर वाहन छोड़ने से साफ इनकार कर दिया। इस रवैये को न्यायालय के आदेश की सीधी अवहेलना माना गया।
मामले को गंभीरता से लेते हुए न्यायालय ने इसे न्यायिक गरिमा के खिलाफ करार दिया और सदर कोतवाल प्रवेश राणा के विरुद्ध प्रकीर्ण वाद दर्ज करने के आदेश पारित कर दिए। साथ ही उन्हें न्यायालय में उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने के निर्देश भी दिए गए हैं।
कानूनी जानकारों का कहना है कि न्यायालय के आदेशों की अवहेलना न केवल प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाती है, बल्कि यह न्यायिक व्यवस्था की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े करती है। यदि किसी अधिकारी द्वारा जानबूझकर आदेशों की अनदेखी की जाती है, तो उस पर सख्त कार्रवाई होना स्वाभाविक है।
इस पूरे मामले के बाद पुलिस महकमे में भी हलचल मची हुई है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस प्रकरण को लेकर और भी प्रशासनिक कार्रवाई हो सकती है। न्यायालय का यह कदम कानून के शासन को बनाए रखने की दिशा में एक सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है।