मुनीश चंद्र शर्मा, फतेहगंज पूर्वी (बरेली)
जनपद बरेली के कस्बा फतेहगंज पूर्वी की नई कॉलोनी इन दिनों बदहाली और प्रशासनिक उदासीनता की बदबू से कराह रही है। राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल के पास स्थित एक खाली परिसर बीते लंबे समय से कूड़े का स्थायी अड्डा बना हुआ है। हालात यह हैं कि कूड़े के पहाड़ अब पूरे इलाके की पहचान बनते जा रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग आंखें मूंदे बैठे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कोई नई समस्या नहीं है। महीनों से कूड़ा यहां डाला जा रहा है, लेकिन उसके नियमित निस्तारण की कोई व्यवस्था नहीं की गई। नतीजा यह है कि चारों ओर गंदगी फैल चुकी है, तेज दुर्गंध से लोगों का जीना दूभर हो गया है और मच्छरों व आवारा पशुओं का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों के स्वास्थ्य पर सीधा खतरा मंडरा रहा है, लेकिन न नगर पंचायत जाग रही है और न ही ग्राम पंचायत।
निवासियों का आरोप है कि इस गंभीर समस्या को लेकर कई बार शिकायतें की गईं, संबंधित अधिकारियों को अवगत कराया गया, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन मिले, समाधान नहीं। सफाई व्यवस्था पूरी तरह से फेल नजर आ रही है, जिससे यह साफ हो गया है कि प्रशासनिक तंत्र जमीन पर काम करने के बजाय फाइलों में ही सक्रिय है।
प्रशासन की इस बेरुखी से तंग आकर अब स्थानीय लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है। उन्होंने सोशल मीडिया को हथियार बनाते हुए तस्वीरें और वीडियो साझा किए और कूड़े के तत्काल निस्तारण की मांग की है। लोगों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही सफाई नहीं हुई, तो वे सड़कों पर उतरकर आंदोलन करने से पीछे नहीं हटेंगे।
नगरवासियों को उम्मीद है कि सोशल मीडिया पर उठ रही आवाज और जनता का दबाव शायद प्रशासन की नींद तोड़े और नई कॉलोनी को इस गंदगी से मुक्ति मिल सके। सवाल यह है कि क्या जिम्मेदार अधिकारी अब भी खामोश रहेंगे या समय रहते कार्रवाई करेंगे?