राष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर मथुरा स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय एवं गो-अनुसंधान संस्थान (डुवासू) युवाशक्ति के वैचारिक जागरण का साक्षी बना। स्वामी विवेकानंद की पावन जयंती पर आयोजित यह कार्यक्रम औपचारिकता नहीं, बल्कि युवाओं के चरित्र और व्यक्तित्व निर्माण का स्पष्ट आह्वान था। रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम, वृंदावन के सहयोग से हुए इस आयोजन में विश्वविद्यालय परिसर वैचारिक ऊर्जा से सराबोर नजर आया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति डॉ. अभिजित मित्र ने की। मुख्य वक्ता रामकृष्ण मिशन के संन्यासी स्वामी ओजोमयानंद जी ने “स्वामी विवेकानंद और व्यक्तित्व विकास” विषय पर ओजस्वी और विचारोत्तेजक व्याख्यान दिया। उन्होंने दो टूक कहा कि व्यक्तित्व विकास फैशन, भाषा या मंचीय आत्मविश्वास का नाम नहीं, बल्कि मजबूत चरित्र-निर्माण की सतत प्रक्रिया है। उन्होंने युवाओं से अपने भीतर निहित दिव्यता को पहचानने, एकाग्रता, साहस, परिश्रम और स्वाभिमान को जीवन का आधार बनाने का आह्वान किया।
स्वामी विवेकानंद के कालजयी विचारों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि श्रेष्ठ चरित्र से ही श्रेष्ठ व्यक्ति और श्रेष्ठ व्यक्ति से सशक्त राष्ट्र का निर्माण संभव है। यह संदेश उपस्थित युवाओं के मन में गहराई तक उतर गया। कार्यक्रम में छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों सहित 450 से अधिक प्रतिभागियों की सक्रिय भागीदारी ने आयोजन की सार्थकता को सिद्ध किया।
युवाओं की सहभागिता को कक्षा से बाहर ले जाते हुए स्वामी विवेकानंद के जीवन और शिक्षाओं पर आधारित ऑनलाइन प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसमें छात्र, शिक्षक और कर्मचारी वर्ग ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इसके साथ ही स्वामी विवेकानंद के जीवन-दर्शन पर आधारित पुस्तकों की प्रदर्शनी और विक्रय स्टॉल आकर्षण का केंद्र रहे।
डुवासू में मनाया गया राष्ट्रीय युवा दिवस यह स्पष्ट संदेश दे गया कि विश्वविद्यालय केवल डिग्री देने के केंद्र नहीं, बल्कि चरित्र, चेतना और राष्ट्रनिर्माण की प्रयोगशालाएं हैं। जहां से जागरूक और जिम्मेदार युवा तैयार होते हैं।