सेवा केवल एक कार्य नहीं, बल्कि आत्मिक साधना है। ऐसी साधना जिसमें अनुशासन, संयम और निरंतरता के साथ मन, वचन और कर्म की शुद्धता अनिवार्य होती है। सेवा करते समय यदि किसी प्रकार की अपेक्षा, राग-द्वेष या तुलना आ जाए, तो उसकी पवित्रता क्षीण हो जाती है। सेवा का अर्थ केवल दान तक सीमित नहीं है, बल्कि किसी के दुःख को समझना, समय देना, स्नेह देना और आवश्यकता पड़ने पर मौन रहना भी सेवा के ही रूप हैं। यह विचार श्रीमद् जगद्गुरु पीपाधीश्वराचार्य बलरामदास देवाचार्य महाराज ने व्यक्त किए।
यह विचार स्वर्गीय श्रीराम बाबू अग्रवाल एवं स्वर्गीय प्रेमवती अग्रवाल की पुण्य स्मृति में, बृजवासी परिवार के सौजन्य से, कल्याणं करोति नेत्र संस्थान द्वारा आयोजित निःशुल्क नेत्र चिकित्सा शिविर के अवसर पर रखे गए। शिविर का आयोजन गोवर्धन रोड स्थित कल्याणं करोति नेत्र संस्थान के प्रांगण में किया गया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि एडीएम नमामि गंगे राकेश सिंह ने कहा कि मानव शरीर के सभी अंगों का अपना-अपना महत्व होता है। जैसे अकेले व्यक्ति से परिवार नहीं बनता, वैसे ही शरीर के किसी एक अंग में समस्या आने पर पूरा शरीर प्रभावित होता है। सभी अंगों के परस्पर सहयोग से ही शरीर स्वस्थ और सक्रिय रहता है।
उन्होंने कहा कि नेत्र चिकित्सा और पुनर्वास के माध्यम से यहाँ शरीर को संपूर्ण बनाने का कार्य किया जा रहा है। दृष्टि केवल देखने का साधन नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता, आत्मसम्मान और जीवन की गुणवत्ता से सीधा संबंध रखती है। जब दृष्टि बाधित होती है, तो उसका प्रभाव व्यक्ति के पूरे जीवन पर पड़ता है।
कल्याण दास अग्रवाल ने अपने संबोधन में श्रवण कुमार की प्रेरक कथा का उल्लेख करते हुए कहा कि जिस प्रकार श्रवण कुमार ने अपने नेत्रहीन माता-पिता की सेवा को जीवन का लक्ष्य बनाया, उसी प्रकार नेत्र ऑपरेशन करने वाले चिकित्सक, सेवा में जुटे कर्मचारी और सहयोगी सभी आज के समय के श्रवण कुमार हैं। उन्होंने कल्याणं करोति नेत्र संस्थान के सेवा कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि यह संस्थान केवल नेत्र रोगों का उपचार नहीं, बल्कि मानवीय संवेदना, संस्कार और करुणा को भी समाज में जीवित रखे हुए है।
नीता सिंह, प्रधानाचार्य, रतन लाल फूल कटोरी देवी सीनियर सेकेंडरी स्कूल, सरस्वती बालिका विद्या मंदिर, गोवर्धन रोड, मथुरा ने कहा कि हमें अपने आसपास के जरूरतमंद लोगों की सहायता के लिए सदैव तत्पर रहना चाहिए। सेवा और परोपकार ही मानव जीवन का वास्तविक उद्देश्य है। किसी असहाय की सहायता करना ही सच्ची ईश्वर-भक्ति है।
कार्यक्रम की समीक्षा करते हुए कल्याणं करोति नेत्र संस्थान के महासचिव सुनील कुमार शर्मा ने बताया कि संस्थान का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी व्यक्ति आर्थिक अभाव के कारण अपनी दृष्टि से वंचित न रहे। संस्थान वर्षों से निःशुल्क एवं रियायती नेत्र चिकित्सा सेवाओं के माध्यम से समाज के कमजोर और वंचित वर्गों तक गुणवत्तापूर्ण उपचार पहुँचा रहा है।
उन्होंने बताया कि नियमित रूप से निःशुल्क नेत्र जांच शिविर, मोतियाबिंद ऑपरेशन, चश्मा वितरण, दवाइयों की उपलब्धता तथा जटिल नेत्र रोगों का उन्नत उपचार किया जाता है। साथ ही दृष्टिबाधित बच्चों के पुनर्वास, विशेष शिक्षा और कौशल विकास के क्षेत्र में भी संस्थान उल्लेखनीय कार्य कर रहा है।
इस निःशुल्क नेत्र चिकित्सा शिविर में दूर-दराज के क्षेत्रों से आए कुल 348 नेत्र रोगियों की जांच की गई, जिनमें से 101 रोगियों की सफल शल्य चिकित्सा विशेषज्ञ चिकित्सकीय टीम द्वारा की गई। शिविर में रोगियों के लिए दवाइयाँ, चश्मे, भोजन, पलंग-बिस्तर सहित सभी आवश्यक व्यवस्थाएँ पूर्णतः निःशुल्क रहीं।
कार्यक्रम का संचालन निरूपम भार्गव ने किया। इस अवसर पर सुधा अग्रवाल, नितिन बाबू अग्रवाल, नितांशु, मेध अग्रवाल, रीना सारस्वत (गाजियाबाद), सर्वेश कुमार शर्मा एडवोकेट, रामकिशोर पूर्व प्रधान बसौती, अमित प्रधान जिखनगांव, अशोक प्रधान खामनी, के.पी. सिंह सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।