चुनावों और विशेष अवसरों पर तहसील स्तर पर जनप्रतिनिधियों एवं वरिष्ठ अधिकारियों के कार्यक्रमों के लिए बार-बार अस्थायी हेलीपैड बनाए जाने से होने वाले सरकारी खर्च को देखते हुए प्रदेश सरकार ने बड़ा निर्णय लिया है। सरकार ने सभी तहसील मुख्यालयों पर स्थायी हेलीपैड के निर्माण की योजना लागू की है।
इस योजना के तहत जिले में भूमि चिह्नांकन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जिलाधिकारी अविनाश सिंह ने मीरगंज सहित सभी उपजिलाधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि हेलीपैड निर्माण के लिए उपयुक्त भूमि का चयन कर रिपोर्ट शीघ्र प्रस्तुत की जाए।
जिले में कुल छह तहसीलें हैं। सदर तहसील क्षेत्र में पुलिस लाइंस परिसर में पहले से स्थायी हेलीपैड मौजूद है, जबकि आंवला, बहेड़ी, फरीदपुर, मीरगंज और नवाबगंज तहसीलों में स्थायी हेलीपैड निर्माण की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है।
राजस्व विभाग द्वारा चयनित भूमि लोक निर्माण विभाग को हस्तांतरित की जाएगी। भूमि उपलब्ध होते ही पीडब्ल्यूडी द्वारा सर्वे कर निर्माण का एस्टीमेट तैयार किया जाएगा। लोक निर्माण विभाग प्रांतीय खंड के अधिशासी अभियंता भगत सिंह ने बताया कि सभी तहसील मुख्यालयों पर स्थायी हेलीपैड निर्माण की कार्यवाही चल रही है और भूमि विवरण मिलते ही कार्ययोजना बनाई जाएगी।
मीरगंज तहसील मुख्यालय में स्थायी हेलीपैड निर्माण के लिए लोक निर्माण विभाग ने एसडीएम से निश्शुल्क भूमि उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है। इस संबंध में निर्माण खंड-प्रथम के अधिशासी अभियंता राजीव अग्रवाल ने एसडीएम मीरगंज को पत्र भेजा है।
पत्र पर संज्ञान लेते हुए एसडीएम मीरगंज आलोक कुमार ने तहसीलदार आशीष कुमार सिंह को भूमि चयन कर प्रस्ताव प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। एसडीएम ने बताया कि हेलीपैड निर्माण के लिए उपयुक्त भूमि की तलाश जारी है और शीघ्र ही प्रस्ताव शासन को भेज दिया जाएगा।
स्थायी हेलीपैड के निर्माण से आपदा प्रबंधन, चिकित्सा आपातकाल, वीआईपी आवागमन में सुविधा मिलेगी, साथ ही सरकारी धन की बचत भी सुनिश्चित हो सकेगी।