जागरण टुडे, कासगंज।
जनपद कासगंज के नवीन गल्ला मंडी परिसर में स्थित गौशाला से सामने आई तस्वीरें और हालात बेहद हृदय विदारक हैं। संरक्षण के उद्देश्य से बनाई गई इस गौशाला में गोवंशों की हालत इतनी बदतर हो चुकी है कि आए दिन गायों की भूख, प्यास और ठंड के कारण मौत हो रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह गौशाला अब संरक्षण स्थल नहीं, बल्कि गोवंशों के लिए यातना गृह बनती जा रही है।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार गौशाला में बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव है। गायों के लिए न तो पर्याप्त चारे की व्यवस्था है और न ही साफ पानी उपलब्ध कराया जा रहा है। कड़ाके की ठंड के बावजूद उन्हें बचाने के लिए टीन शेड, बोरे, पुआल या अन्य किसी भी तरह का समुचित इंतजाम नहीं किया गया है। परिणामस्वरूप कमजोर और बीमार गायें ठंड से कांपती हुई दम तोड़ रही हैं।
चिकित्सा सुविधाओं की स्थिति भी चिंताजनक है। बीमार गायों के इलाज के लिए न तो पशु चिकित्सक नियमित रूप से पहुंचते हैं और न ही दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है। कई मामलों में घायल और असहाय गायों को तड़पते हुए देखा गया है। सबसे भयावह दृश्य तब सामने आता है जब जीवित और कमजोर गायों पर पक्षी झपट्टा मारते नजर आते हैं, जो प्रबंधन की घोर लापरवाही और संवेदनहीनता को उजागर करता है।
दया फाउंडेशन के संस्थापक आशीष चौहान ने गौशाला प्रबंधन पर गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि गौशाला के नाम पर मिलने वाले सरकारी फंड का दुरुपयोग किया जा रहा है। कागजों में व्यवस्थाएं दुरुस्त दिखाई जाती हैं, जबकि जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल विपरीत है। उनका आरोप है कि जिम्मेदार लोग अपनी जेब भरने में लगे हैं और बेजुबान जानवर तिल-तिल कर मरने को मजबूर हैं।
वहीं गौशाला संरक्षक विक्रांत चौहान ने आरोप लगाया कि कई बार बीमार और अधमरी गायों को भी जिंदा दफनाने जैसी अमानवीय हरकतें की जाती हैं। उन्होंने पशुपालकों से अपील की कि वे अपने पशुओं को बेसहारा न छोड़ें और उनकी देखभाल स्वयं करें। साथ ही, शासन-प्रशासन से दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है।
स्थानीय नागरिकों और समाजसेवी संस्थाओं ने उत्तर प्रदेश सरकार व जिला प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप कर गौशाला की बदहाल स्थिति सुधारने और जिम्मेदार अधिकारियों व कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई करने की मांग की है, ताकि गोवंशों को इस नारकीय जीवन से मुक्ति मिल सके।