जनपद बरेली की आंवला तहसील क्षेत्र के गांव अनुरुद्धपुर की वृहद गोशाला में कई गोवंशों की मौत से बरेली से लेकर लखनऊ तक खलबली मची है। पशुधन मंत्री धर्मपाल सिंह की विधानसभा क्षेत्र में हुई घटना के बाद मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डा. मनमोहन पांडेय और पशु चिकित्साधिकारी डा. संजय वर्मा की भी बड़ी लापरवाही मानी गयी है। सीडीओ देवयानी ने पशु चिकित्साधिकारी के निलंबन और सीवीओ का बरेली से ट्रांसफर करने की संस्तुति करते हुए शासन को पत्र भेजा है।
बुधवार को मझगवां ब्लॉक के गांव अनिरुद्धपुर की गोशाला में दो दर्जन से अधिक गोवंश की मौत का पता चलने गोशाला पहुंचे विश्व हिंदू परिषद व बजरंग दल कार्यकर्ताओं ने मृत और बुरी दशा में पड़े पशुओं को देखकर जमकर हंगामा किया था। इसकी सूचना जिलाधिकारी को दिए जाने के बाद एडीएम पूर्णिमा सिंह, एसडीएम विदुषी सिंह, सीओ नितिन कुमार, बीडीओ सुनील कुमार ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। इस दौरान कई गोवंश बुरी दशा में पड़े पाए गए थे। गोशाला ने जानवरों के लिए हर चारा नहीं मिला न ही चोकर था। पशुशाला में भूसा भी भरपूर नहीं था, भीषण गंदगी थी। जिसके बाद गोशाला में संरक्षित पशुओं की दुर्दशा के जिम्मेदार नोडल अधिकारी मंडी परिषद के डिप्टी डॉयरेक्टर डॉ. विश्वेंद्र कुमार, बीडीओ डॉ. सुनील कुमार वर्मा, पशु चिकित्साधिकारी डॉ. संजय वर्मा और ग्राम विकास अधिकारी शिप्रा सिंह को नोटिस जारी किया गया। वहीं, मामले में प्रधान और उसके पति के खिलाफ अलीगंज थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई। इधर, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में पांच में से तीन मौतें भूख से और दो पशुओं की मौत आयु व कमजोरी के कारण हुई पाई गई। जिसके बाद मामला और तूल पकड़ गया। पशुधन मंत्री के साथ ही शासन स्तर से पूरे घटनाक्रम के दौरान की कार्रवाई की जानकारी मांगी गई।
सीडीओ देवयानी ने बताया कि बीडीओ, पशु चिकित्साधिकारी, पंचायत सचिव और गोशाला के नोडल अधिकारी को नोटिस दिया है। इनका जवाब संतोषजनक नहीं मिलने पर कार्रवाई करेंगे। प्रधान व उसके पति पर एफआईआर कराई जा चुकी है। जांच में यह सामने आया है कि गोशाला में पशुओं के लिए पर्याप्त चारा और देखभाल नहीं की गई, जबकि जिम्मेदार अधिकारी मौके पर नियमित निरीक्षण करने में नाकाम रहे। लिहाजा, पशु चिकित्साधिकारी को निलंबित और सीवीओ का बरेली से ट्रांसफर करने की संस्तुति करते हुए अपर मुख्य सचिव को पत्र भेजा गया है।