पशु चिकित्सा और आयुर्वेदिक विज्ञान के समन्वय को नई दिशा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए प्रस्तावित पोस्ट-ग्रेजुएट डिप्लोमा इन वेटरनरी आयुर्वेद (PGDVA) के लिए विनियामक ढांचे और पाठ्यक्रम को अंतिम रूप देने हेतु दीनदयाल उपाध्याय पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय एवं गौ अनुसंधान संस्थान (डुवासू), मथुरा में एक उच्चस्तरीय हितधारक परामर्श बैठक आयोजित की गई।
इस महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता डॉ. अभिजित मित्र, माननीय कुलपति, डुवासू ने की। बैठक में देश के पशु चिकित्सा, आयुर्वेद और अनुसंधान क्षेत्र के कई प्रतिष्ठित विशेषज्ञों ने सहभागिता कर अपने अनुभव और सुझाव साझा किए। इनमें डॉ. के. एम. एल. पाठक, पूर्व उप-महानिदेशक (पशु विज्ञान), आईसीएआर, नई दिल्ली एवं पूर्व कुलपति डुवासू; डॉ. देवेंद्र स्वरूप, पूर्व निदेशक, आईसीएआर–केंद्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान, मथदूम, फरह; डॉ. रमेश सोमवंशी, पूर्व प्रधान वैज्ञानिक, आईसीएआर–आईवीआरआई, इज्जतनगर, बरेली; डॉ. हरि राम भदौरिया, पूर्व संयुक्त निदेशक (आयुर्वेद निदेशालय, उत्तर प्रदेश) एवं पूर्व सदस्य केंद्रीय भारतीय चिकित्सा परिषद, भारत सरकार; तथा डॉ. शम्भु पटेल, एसोसिएट प्रोफेसर, द्रव्यगुण विभाग, विवेक कॉलेज ऑफ आयुर्वेदिक साइंसेज एवं हॉस्पिटल, बिजनौर प्रमुख रूप से शामिल रहे।
बैठक के दौरान PGDVA पाठ्यक्रम की संरचना, विनियामक अनुरूपता, आवश्यक आधारभूत संरचना, संकाय की योग्यता एवं संख्या, प्रवेश प्रक्रिया, तथा परीक्षा व मूल्यांकन प्रणाली जैसे अहम बिंदुओं पर विस्तृत चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि प्रस्तावित कार्यक्रम शैक्षणिक रूप से सुदृढ़, व्यावहारिक रूप से उपयोगी और रोजगारोन्मुख होना चाहिए।
कुलपति डॉ. अभिजित मित्र ने कहा कि वेटरनरी आयुर्वेद पशु स्वास्थ्य प्रबंधन में प्राकृतिक, सुरक्षित और टिकाऊ विकल्प प्रस्तुत करता है। PGDVA कार्यक्रम से न केवल पशुपालकों को लाभ मिलेगा, बल्कि पशु चिकित्सा क्षेत्र में नई संभावनाओं के द्वार भी खुलेंगे। बैठक में सभी हितधारकों की सहमति से पाठ्यक्रम को राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप विकसित करने की दिशा में सकारात्मक सहमति बनी।