श्रीकृष्ण जन्मभूमि परिसर स्थित श्री केशवदेव मंदिर बसंत पंचमी के पावन अवसर पर शुक्रवार को बसंती रंगों में सराबोर होकर श्रद्धालुओं को दिव्य अनुभूति कराएगा। ऋतुराज बसंत के आगमन के साथ ही मंदिर परिसर में उल्लास, भक्ति और आनंद का वातावरण छा जाएगा। बसंत पंचमी को ब्रजभूमि में विशेष उत्सव के रूप में मनाया जाता है और श्रीकृष्ण जन्मस्थान के सभी मंदिरों में यह पर्व अत्यंत श्रद्धा और परंपरा के साथ संपन्न होता है।
श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा-संस्थान के सचिव कपिल शर्मा ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण ने श्रीमद्भगवद्गीता में “ऋतुनाम कुसुमाकर” कहकर ऋतुराज बसंत को अपनी दिव्य विभूति बताया है। इसी कारण बसंत पंचमी केवल एक पर्व नहीं, बल्कि संपूर्ण ब्रजमंडल के लिए आनंदोत्सव है। इस दिन श्रीकेशवदेव जी महाराज के दिव्य श्रीविग्रह के दर्शन कर भक्त भाव-विभोर हो उठेंगे।
परंपरा के अनुसार बसंत पंचमी के अवसर पर श्रीकेशवदेव मंदिर को विशेष बसंती स्वरूप प्रदान किया जाएगा। माघ शुक्ल बसंत पंचमी को सुबह से ठाकुर श्री केशवदेव जी महाराज अपने मनोहारी बसंती श्रृंगार में भक्तों को दर्शन देंगे। ठाकुरजी के वस्त्र, पुष्प सज्जा, आभूषण और मंदिर की संपूर्ण सजावट बसंती रंगों में सजी होगी, जो श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत आकर्षक और दर्शनीय होगी। साथ ही मंदिर परिसर में विशेष बसंती विद्युत सज्जा की जाएगी, जिससे संपूर्ण वातावरण और अधिक दिव्य हो उठेगा।
बसंत पंचमी के उपलक्ष्य में लीलामंच पर सायं 4 बजे से भजन-संध्या का आयोजन किया जाएगा, जिसमें भक्तिरस से ओतप्रोत भजनों की प्रस्तुतियां होंगी। इसके अतिरिक्त दर्शनार्थ पधारने वाले श्रद्धालुओं के लिए अन्नक्षेत्र में सुबह से शाम तक निरंतर प्रसाद वितरण किया जाएगा।
बसंत पंचमी से श्रीकृष्ण जन्मस्थान के सभी मंदिरों में परंपरागत होली (फाग) महोत्सव का आरंभ हो जाता है। पूरे फाल्गुन मास तक ठाकुरजी के साथ अबीर, गुलाल और फूलों की होली श्रद्धालुओं द्वारा हर्षोल्लास के साथ खेली जाती है, जिससे ब्रज की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक छटा और अधिक निखर उठती है।