बरेली और आसपास के जिलों में सरसों तेल के नाम पर राइस ब्रान, कनोला और सोयाबीन जैसे अन्य खाद्य तेलों की धड़ल्ले से बिक्री का बड़ा मामला सामने आया है। नेपाल से आयातित और स्थानीय स्तर पर उत्पादित इन तेलों की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि ये सभी तेल देखने में सरसों तेल जैसे पीले रंग के होते हैं, जिससे आम उपभोक्ता धोखे का शिकार हो रहा है।
सूत्रों के मुताबिक बरेली व आसपास के क्षेत्रों में खाद्य तेलों का कारोबार सौ करोड़ रुपये प्रति माह से अधिक का है। बाजार में अधिकांश तेल सरसों तेल बताकर बेचे जा रहे हैं, जबकि वास्तविकता कुछ और ही है। बताया जा रहा है कि नेपाल में निर्मित सोयाबीन, कनोला व रैपसीड तेल को सरसों तेल बताकर बाजार में उतारा जा रहा है। इससे टैक्स चोरी तो नहीं, लेकिन उपभोक्ताओं के साथ खुली धोखाधड़ी की जा रही है।
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) विभाग में अधिकारियों और कर्मचारियों की संख्या सीमित होने के कारण मिलावटखोरों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पा रही है। पीले रंग के अन्य खाद्य तेलों को सरसों तेल बताकर बेचना कानूनन अपराध है, इसके बावजूद मुनाफाखोर बेखौफ हैं।
खंडेलवाल एडिबल ऑयल कंपनी पर छापेमारी
दो दिन पूर्व एफएसडीए टीम ने फरीदपुर स्थित खंडेलवाल एडिबल ऑयल कंपनी परिसर में छापा मारा। कार्रवाई के दौरान 15-15 किलोग्राम क्षमता के कुल 110 टीन सरसों तेल भंडारित मिले, जिनमें से नमूने लेकर जांच के लिए भेजे गए। इसके अलावा नेपाल निर्मित ‘माया’ ब्रांड खाद्य तेल और ‘साजन’ ब्रांड रैपसीड आयल के भी नमूने भरे गए।
टीम ने कुल 30 टीन तेल को तत्काल प्रभाव से सीज कर बिक्री पर रोक लगा दी है। अधिकारियों के अनुसार इससे पहले भी इसी परिसर से भरे गए नमूनों में ‘चक्र’ नामक ब्रांड मानकों पर खरा नहीं उतर पाया था।
एफएसडीए अधिकारियों ने बताया कि नेपाली ‘साजन’ और ‘माया’ ब्रांड तेल देखने में सरसों तेल जैसे पीले रंग के थे, जिन्हें बाजार में सरसों तेल बताकर बेचा जा रहा था। अन्य तैयार किए जा रहे तेलों पर भी निगरानी बढ़ा दी गई है।
410 किलो रिफाइंड राइस ब्रान तेल सीज
गुरुवार शाम पुलिस ने ई-रिक्शा में प्लास्टिक के ड्रमों में भरकर बाजार में खपाने के लिए ले जाए जा रहे खाद्य तेल को पकड़ा। पूछताछ में ई-रिक्शा चालक संतोषजनक जवाब नहीं दे सका। सूचना पर नगर मजिस्ट्रेट और एफएसडीए टीम मौके पर पहुंची।
जांच में पाया गया कि ड्रमों में भरा तेल खुला था, जिस पर न तो कोई लेबल, कीमत, वजन, निर्माता का नाम और न ही उत्पादन तिथि अंकित थी। एफएसडीए टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए पूरा माल सीज कर पुलिस को सौंप दिया
मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी अक्षय गोयल के निर्देश पर खाद्य सुरक्षा अधिकारी सुशील सचान और इंद्रजीत सिंह ने थाना बारादरी पहुंचकर जांच की। पूछताछ में सामने आया कि ड्रमों में भरा 410 किलो रिफाइंड राइस ब्रान तेल लाल चन्द्र एग्रो ऑयल प्रा. लि., ब्रह्मपुरा नई बस्ती बरेली द्वारा करगैना क्षेत्र में बिक्री के लिए भेजा जा रहा था।
बताया गया कि यह सप्लाई कारोबारी ज्ञान प्रकाश साहू को होनी थी। मौके पर कारोबारी राधेश्याम भाटिया ने वैभव एडिबल, रनिया (कानपुर) से तेल खरीदने का बिल भी दिखाया। एफएसडीए टीम ने 410 किलो तेल का नमूना जांच के लिए लिया और शेष 408 किलो तेल सीज कर किसी भी प्रकार की बिक्री पर रोक लगा दी।
एफएसडीए विभाग ने साफ किया है कि सरसों तेल के नाम पर अन्य खाद्य तेल बेचने वालों के खिलाफ जल्द ही बड़ी कार्रवाई की जाएगी।