जनपद बरेली में तैनात सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री के अचानक इस्तीफे से सोमवार को प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में खलबली मच गई। गणतंत्र दिवस के अवसर पर सुबह तक सरकारी कार्यक्रमों में सक्रिय रहने वाले सिटी मजिस्ट्रेट ने दोपहर बाद सोशल मीडिया के जरिए अपने पद से इस्तीफा देने की घोषणा कर दी। उन्होंने यह कदम प्रयागराज में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्यों के साथ हुई कथित मारपीट तथा केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए नए यूजीसी नियमों के विरोध में उठाया है।
कानपुर निवासी अलंकार अग्निहोत्री उत्तर प्रदेश सिविल सेवा (पीसीएस) के 2019 बैच के अधिकारी हैं। वह बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से बीटेक कर चुके हैं और प्रशासनिक सेवा में तेजतर्रार अधिकारियों में गिने जाते रहे हैं। उनके इस्तीफे की खबर सामने आते ही बरेली से लेकर लखनऊ तक अफसरशाही और सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई।
सुबह ध्वजारोहण, दोपहर में इस्तीफा
जानकारी के अनुसार सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री सोमवार सुबह करीब साढ़े सात बजे अपने सरकारी आवास से निकलकर कलेक्ट्रेट पहुंचे थे। वहां जिलाधिकारी अविनाश सिंह समेत अन्य अधिकारियों के साथ गणतंत्र दिवस के ध्वजारोहण कार्यक्रम में शामिल हुए। इसके बाद वह अपने कार्यालय गए, जहां कार्यालय बोर्ड पर अपने नाम के आगे “रिजाइन” लिखकर संकेत दे दिया कि वह बड़ा फैसला ले चुके हैं।
करीब डेढ़ बजे वह एडीएम कंपाउंड स्थित अपने सरकारी आवास पहुंचे। यहां उन्होंने अपने आवास के बाहर बैनर लेकर फोटो खिंचवाए, जिन पर “संतों का अपमान नहीं सहेगा हिंदुस्तान”, “यूजीसी का काला कानून वापस लो” जैसे नारे लिखे थे। इसके साथ ही उन्होंने सोशल मीडिया पर अपना इस्तीफा सार्वजनिक कर दिया।
प्रशासन और राजनीति में उबाल
इस्तीफे की खबर फैलते ही सिटी मजिस्ट्रेट के आवास पर ब्राह्मण संगठनों, सामाजिक प्रतिनिधियों और विभिन्न राजनीतिक दलों से जुड़े ब्राह्मण नेताओं की भीड़ जुटने लगी। लोगों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और अलंकार अग्निहोत्री के समर्थन में आंदोलन की चेतावनी तक दे डाली।
इस बीच स्थिति को संभालने के लिए प्रशासनिक अमला सक्रिय हो गया। सीडीओ, एडीएम समेत कई वरिष्ठ अधिकारी सिटी मजिस्ट्रेट के आवास पहुंचे और बंद कमरे में उनसे लंबी बातचीत की। बताया गया कि अधिकारी उनसे इस्तीफा वापस लेने का आग्रह करते रहे।
देर रात तक जिलाधिकारी अविनाश सिंह के आवास पर भी उच्चस्तरीय बैठक चली, जिसमें एसएसपी अनुराग आर्य, एडीएम प्रशासन, एडीएम सिटी और एसडीएम सदर सहित कई अधिकारी मौजूद रहे।
मीडिया के सामने मुखर नजर आए अलंकार अग्निहोत्री
इस्तीफे के बाद मीडिया से बातचीत में अलंकार अग्निहोत्री बेहद आक्रामक और भावुक नजर आए। उन्होंने कहा कि सामान्य वर्ग अब केंद्र और राज्य सरकार से खुद को अलग-थलग महसूस करने लगा है। उनका आरोप था कि हाल के दिनों में ऐसे हालात बन रहे हैं, जो देश को सामाजिक रूप से अस्थिर कर सकते हैं।
उन्होंने प्रयागराज माघ मेले की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि मौनी अमावस्या के स्नान के दौरान शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के बटुक शिष्यों के साथ जो व्यवहार किया गया, वह अत्यंत निंदनीय है। चोटी पकड़कर घसीटना और मारपीट करना न केवल धार्मिक मर्यादाओं का उल्लंघन है, बल्कि प्रशासन कीसंवेदनहीनता भी दर्शाता है।
यूजीसी नियमों को बताया भेदभावपूर्ण
अलंकार अग्निहोत्री ने 13 जनवरी 2026 को जारी यूजीसी रेगुलेशंस 2026 को भी अपने इस्तीफे का बड़ा कारण बताया। उन्होंने कहा कि नए नियमों में सामान्य वर्ग को संदेह की नजर से देखा गया है और समता के नाम पर ऐसे प्रावधान किए गए हैं, जो समाज में विभाजन और असंतोष को बढ़ावा देंगे। उनका दावा है कि इससे शैक्षणिक संस्थानों में ब्राह्मण विद्यार्थियों का उत्पीड़न बढ़ सकता है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ब्राह्मण समाज के जनप्रतिनिधि, चाहे वे सांसद हों या विधायक, समाज की आवाज उठाने के बजाय कॉरपोरेट कंपनियों के कर्मचारियों की तरह व्यवहार कर रहे हैं।
इस्तीफे में क्या लिखा
अलंकार अग्निहोत्री ने अपने इस्तीफा में उत्तर प्रदेश सिविल सेवा वर्ष 2019 बैच का अपने को राजपत्रित अधिकारी बताया है। साथ ही उन्होंने अपनी शिक्षा दीक्षा बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में होने का जिक्र किया है। उन्होंने सीधे राज्यपाल को संबोधित पत्र में लिखा कि प्रयागराज में माघ मेले में मौनी अमावस्या के स्नान के दौरान ज्योतिष पीठ ज्योर्तिमठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानन्द एवं उनके शिष्य, बटुक, ब्राह्मणों से स्थानीय प्रशासन ने मारपीट की। वृद्ध आचार्यों को मारते हुए बटुक ब्राह्मण को जमीन पर गिराकर एवं उसकी शिखा को पकड़कर घसीटकर पीटा गया और उसकी मर्यादा का हनन किया गया, चूंकि चोटी/शिखा ब्राह्मण, साधु संतों का धार्मिक एवं सांस्कृतिक प्रतीक है और मैं (अलंकार अग्निहोत्री) स्वयं ब्राह्मण वर्ण से हूं।
पत्र में आगे लिखा है कि प्रयागराज की घटना से यह स्पष्ट है कि स्थानीय प्रशासन द्वारा ब्राह्मणों का अपमान किया गया है। अलंकार अग्निहोत्री ने यह भी कहा है कि प्रयागराज में हुई घटना एक चिंतनीय एवं गंभीर विषय है और ऐसे प्रकरण इस सरकार में होना एक साधारण ब्राह्मण की आत्मा को कंपा देता है। इस प्रकरण से यह प्रतीत होता है कि स्थानीय प्रशासन एवं वर्तमान की राज्य सरकार एक ब्राह्मण विरोधी विचारधारा के साथ काम कर रही है एवं साधु संतों की अस्मिता के साथ खिलवाड़ कर रही है।
समाज को बाटने वाली नीतियों का विरोध ज़रूरी
इस्तीफ़े में अलंकार अग्निहोत्री ने कहा है कि जब सरकारें समाज और देश को बांटने वाली नीतियां अपनाने लगें, तो उन्हें जगाना ज़रूरी हो जाता है। उन्होंने यूजीसी नए नियमों को काला कानून बताते हुए कहा कि यह कॉलेज व शैक्षणिक माहौल को ज़हरीला बना रहा है, और इसे तत्काल वापस लिया जाना चाहिए।