मेयर डॉ. उमेश गौतम की अध्यक्षता में कार्यकारिणी की बैठक में 978 करोड़ का पुनरीक्षित बजट पास
मेयर डा. उमेश गौतम की अध्यक्षता में शनिवार को नगर निगम कार्यकारिणी समिति की बैठक में 978 करोड़ का पुनरीक्षित बजट पारित कर दिया गया। शहर में विकास कार्यों को गति देने को लिए यह अब तक का सबसे बड़ा बजट है। दावा किया गया इस बजट से शहर के वार्डों में लंबे समय से रुके कामों को रफ्तार मिलेगी। बजट का बड़ा हिस्सा सड़कों, नालियों, स्ट्रीट लाइट्स, पानी, साफ-सफाई व्यवस्था पर खर्च किया जाएगा।
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नगर निगम में महापौर कार्यालय में शनिवार को सुबह 11 बजे बैठक शुरू होने के कुछ समय बाद माहौल भी गर्मा गया। कार्यकारिणी समिति के सदस्यों ने आरोप लगाया कि तमाम वार्ड ऐसे हैं जहां विकास कार्य ठप हैं। इस पर मेयर ने अधूरे कार्यों और स्ट्रीट लाइटों को लेकर अफसरों पर जमकर भड़ास निकाली। कहा नगर निगम ब्याज से दस करोड़ रुपये कमा रहा है, फिर भी सड़कें टूटी और लाइटें बुझी हैं।
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सदस्यों से कहा कि 978 करोड़ का बजट पारित हुआ है। इससे शहर के सभी 80 वार्डो में विकास की गंगा बहेगी। हर वार्ड में 15 दिसंबर तक एक-एक करोड़ के कार्य हर हाल में पूरे करने के निर्देश दिए। बैठक में समिति के सदस्यों ने हाईमास्ट लाइट का मुद्दा उठाया। इस पर मेयर ने कहा कि हर वार्ड में हाईमास्ट लाइट लगनी चाहिए। उन्होंने अधिकारियों से जब पूछा कि अभी तक सभी जगह लाइट क्यों नहीं लगी तो वो बहानेबाजी करने लगे।
मेयर ने कहा कि दिवाली से पहले हमने कहा था हर वार्ड में 25-25 लाइट लग जाएं, लेकिन किसी वार्ड में एक लगी तो किसी में एक भी नहीं लगी। चीफ इंजीनियर से कहा कि निर्माण कार्य से जुड़े प्रस्तावों की फाइल मेरे पास आने में कई कई दिन लग जाते है। कहा हमारा और नगर आयुक्त का ऑफिस आमने-सामने है, फिर भी नगर आयुक्त के पास से हमारे पास आने तक फाइल में नौ दिन लग जाते हैं। अधिकारियों से कहा बाबू का जो लेबल है उसे सुधार दीजिए। बाबू से कहिए 24 घंटे से ज्यादा फाइल अपने पास नहीं रखेंगे। अगर बाबू नहीं मानते हैं तो उन्हें नोटिस जारी करिए। जनता ये पूछती है आपके पास पैसा है फिर भी काम क्यों नहीं हो रहा।
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बरेली की जनता को लगना चाहिए कि हम लोग 24 घंटे उनकी सेवा में लगे हुए हैं। 15 दिन में काम पूरा करवाए। सदस्य पार्षद सतीश कातिब मम्मा ने कहा कि हर बाबू की एक ही कहानी है कि वह बीएलओ की ड्यूटी में लगे हैं, इसलिए फाइलें समय से आगे नहीं बढ़ रही हैं। इस पर नगर आयुक्त संजीव कुमार मौर्य ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसी भी स्तर पर फाइल नहीं रुकनी चाहिए।
हर वार्ड में 50-50 लाख से होंगे नाली और सड़क निर्माण कार्य
शहर के विकास के लिए नगर निगम का 80 करोड़ का बजट है, लेकिन इसमें अब तक केवल 12 करोड़ रुपये ही खर्च हुआ है। वित्तीय वर्ष समाप्त होने में ज्यादा समय नहीं है। इस पर मेयर ने नाराजगी जताई और अफसरों से कहा बजट पूरा है, संसाधन पूरे हैं, लेकिन समय से टेंडर न होने से काम अधूरे हैं। मेयर ने टेंडर निकालने के लिए 15 दिसंबर तक की डेडलाइन दी। कहा कि इसमें अगर देरी हुई तो पैसा लैप्स होगा और यह किसी भी हालत में स्वीकार्य नहीं है। सभी विभागों को कहा गया है कि समय सीमा में काम पूरा करें। कार्यकारिणी ने सभी वार्डों में 50-50 लाख की सड़क, नाली-नाले और अन्य निर्माण कार्यों की स्वीकृति प्रदान की।
पार्षद बोले- चेहतों के वार्डों पर मेहरबानी न दिखाएं अफसर
बैठक में कार्यकारिणी सदस्यों ने हाईमास्ट और स्ट्रीट लाइट को लेकर सवाल उठाए। इस पर मेयर ने कड़ी नाराजगी जताई और सहायक अभियंता अजीत कुमार से पूछा कि वार्डों में लाइटें लगाने में भेदभाव क्यों किया जा रहा है। कई वार्डों में एक भी लाइट नहीं लगी तो कुछ में सात से आठ लाइटें लग गईं। मेयर ने साफ कहा कि अफसर चहेतों का ख्याल रखने के लिए भेदभाव कर रहे हैं। सहायक अभियंता अजीत कुमार से इसको लेकर सवाल किए तो वह बहानेबाजी करने लगे। मेयर ने फटकार लगाते हुए कहा तीन महीने से उनको किस वार्ड में कितनी लाइटें लगी हैं, इसकी लिस्ट नहीं दी जा रही हैं। नगर आयुक्त और अपर नगर आयुक्त से कहा कि सभी वार्डों में समानता के साथ काम होना चाहिए। हर वार्ड में 100-100 लाइटें लगाई जाएं। चीफ इंजीनियर को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सभी जरूरी टेंडर तुरंत जारी हों।
बरेली को इंदौर और चंडीगढ़ जैसा बनाने की योजना
मेयर ने निगम के पास बजट भरपूर होने पर भी टेंडर नहीं किए जाने पर सवाल किए तो अपर नगर आयुक्त से लेकर निर्माण विभाग के चीफ इंजीनियर और एक्सईएन सफाई देते दिखे। मेयर ने कहा कि बरेली को इंदौर और चंडीगढ़ जैसे शहरों की तरह विकसित करने की योजना है। हम चाहते हैं कि किसी भी वार्ड में टूटी सड़क, नाली या अधूरी सीवर लाइन न छोड़ें। हर गली में लाइटें पूरी हों। बरेली पूरी तरह रोशन और व्यवस्थित दिखे, लेकिन बजट होने के बाद भी टेंडर नहीं किए जा रहे हैं। इस पर नगर आयुक्त ने एक्सईएन राजीव राठी को निर्देश दिए कि सबसे पहले सड़क आदि के 50-50 लाख के एस्टीमेट बनाएं, इसके बाद अन्य कार्यों पर ध्यान दिया जाए।
स्ट्रीट डॉग्स को भोजन देने के लिए 45 स्थान चिह्नित
मेयर ने बताया कि स्ट्रीट डॉग्स के लिए सुप्रीम कोर्ट और शासन के निर्देशप्राप्त हो चुके हैं। हम फीडिंग पॉइंट चिह्नित कर रहे हैं, जहां स्ट्रीट डॉग्स को नियत स्थान पर भोजन दिया जाएगा। अभी तक लगभग 45 स्थान चिन्हित कर लिए गए हैं। इससे उनका लोकेशन फिक्स रहेगा और वैक्सीनेशन आसानी से हो सकेगा, क्योंकि अभी वे यहां-वहां घूमते रहते हैं और पकड़ में नहीं आते। इसके अलावा एक शेल्टर होम भी बनाया जा रहा है, जहां बीमार या रेबीज वाले कुत्तों को अलग रखकर इलाज किया जाएगा। इससे लोग सुरक्षित रहेंगे और कुत्तों की उचित देखभाल भी हो सकेगी।