पीलीभीत। यूट्यूब से सीखी तकनीक, घर में लगी फैक्ट्री और बाजार में खपाया गया नशे का जहर…थाना घुंघचाई पुलिस की कार्रवाई ने ऐसे खतरनाक नेटवर्क का पर्दाफाश किया है, जो युवाओं की जिंदगी से खेल रहा था। चौंकाने वाली बात यह है कि प्रदेश में कोडीन युक्त कफ सिरप से मौतों के बाद औषधि विभाग की कथित सख्ती के बावजूद यह अवैध धंधा खुलेआम चलता रहा। मगर विभागीय जिम्मेदार बेखबर रहे।
यह भी पढ़ें: नकली कफ सिरप बनाने वाला फैक्ट्री संचालक गिरफ्तार
जिले में नकली और नशीली दवाओं के अवैध कारोबार पर पुलिस ने बड़ी चोट की है। थाना घुंघचाई पुलिस ने घर में चल रही नकली कफ सिरप फैक्ट्री का भंडाफोड़ करते हुए सुरेश कुमार (41) निवासी लाह, थाना पूरनपुर को गिरफ्तार किया है। आरोपी के कब्जे से बड़ी मात्रा में नकली कफ सीरप बरामद हुए हैं। पूछताछ में सामने आया कि आरोपी ने वर्ष 2003 में सिटी अस्पताल पीलीभीत में कंपाउडर के रूप में काम किया था।
अस्पताल का अनुभव मिलने के बाद उसने गांव लौटकर छोटा क्लीनिक खोला और बाद में शाहजहांपुर जिले तक अपना दायरा बढ़ा। करीब दो साल पहले उसने यूट्यूब पर वीडियो देखकर नकली कफ सिरप बनाने की तकनीक सीखी और अपने घर को ही मिनी फैक्ट्री में बदल दिया। कोडीन युक्त कफ सिरप की बिक्री बंद होने के बाद आरोपी ने टॉप्स गोल्ड और क्यूरेक्स टी जैसे ब्रांडों के नकली रैपर छपवाए। स्प्रिट, ऑरेंज फ्लेवर, सिरप और चीनी के घोल से ऐसा नकली सिरप तैयार किया जाता था, जिसका स्वाद असली जैसा लगे। बरेली से खाली शीशियां और ढक्कन लगाकर लेमिनेशन पैकिंग की जाती थी, ताकि शक की गुंजाइश न रहे। कम लागत, मोटा मुनाफा, यही इस धंधे की असली ताकत थी। 10 शीशियां बनाने में जहां 75 से 80 रुपये खर्च होते थे, वहीं वही माल 600 से 800 रुपये में बिकता था।
आरोपी एक बार में करीब 350 शीशियां तैयार करता और गांव-कस्बों में नशेड़ियों को 80 से 100 रुपये प्रति शीशी के हिसाब से बेचता था। जबकि प्रदेश में कोडिन युक्त कफ सिरप की निगरानी चल रही थी। पुलिस का कहना है कि इस कार्रवाई से नकली और नशीली दवाओं के नेटवर्क पर बड़ी चोट लगी है। आमजन से अपील की गई है कि बिना बिल और संदिग्ध पैकिंग वाली दवाएं न खरीदें।