बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री के इस्तीफे से उपजे प्रशासनिक भूचाल के बीच उत्तर प्रदेश सरकार ने कड़ा कदम उठाते हुए उन्हें निलंबित कर दिया है। उन्हें शामली के कलेक्ट्रेट कार्यालय से संबद्ध किया गया है। साथ ही पूरे प्रकरण की जांच बरेली मंडलायुक्त को सौंपी गई है। यह कार्रवाई ऐसे समय पर हुई है, जब यह मामला प्रदेशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है।
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सोमवार को गणतंत्र दिवस के दिन सिटी मजिस्ट्रेट पद से इस्तीफा देकर अलंकार अग्निहोत्री ने पूरे प्रशासनिक तंत्र को चौंका दिया था। उनका इस्तीफा केवल पद छोड़ने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसके साथ उन्होंने शासन, व्यवस्था और नीतियों पर तीखे सवाल खड़े किए थे। खासतौर पर प्रयागराज के माघ मेले में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्यों के साथ हुई घटना को लेकर उन्होंने खुला विरोध दर्ज कराया था।
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अलंकार अग्निहोत्री ने राज्यपाल और निर्वाचन आयोग को भेजे गए सात पृष्ठों के विस्तृत पत्र में शासन व्यवस्था पर गहरी नाराजगी जताई थी। उन्होंने अपने इस्तीफे के अंत में लिखा कि देश में अब न तो जनतंत्र बचा है और न ही गणतंत्र, बल्कि “भ्रमतंत्र” कायम हो गया है। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों, विशेष रूप से यूजीसी से जुड़े प्रस्तावों पर भी आपत्ति दर्ज की थी। यह भाषा और तेवर प्रशासनिक इतिहास में असामान्य माने जा रहे हैं।
अलंकार अग्निहोत्री ने छोड़ा सरकारी आवास
निलंबन की कार्रवाई के बाद अलंकार अग्निहोत्री ने बरेली स्थित सरकारी आवास भी खाली कर दिया है। उन्होंने कहा कि वह बरेली के लोगों का स्नेह और सम्मान हमेशा अपने साथ ले जाएंगे। हालांकि उन्होंने यह भी आरोप दोहराया कि मौजूदा परिस्थितियों में उन्हें भय और असुरक्षा का अनुभव हो रहा है, जिस कारण आवास छोड़ना उनकी मजबूरी बन गई।
अलंकार अग्निहोत्री ने एक बार फिर डीएम आवास से जुड़ा विवादित आरोप दोहराते हुए कहा कि उन्हें वहां बातचीत के बहाने रोके जाने की कोशिश की गई थी। उनका दावा है कि लखनऊ से आए एक फोन कॉल पर उनके लिए अपशब्दों का प्रयोग किया गया और रातभर रोके रखने की बात कही गई। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर वह कौन अधिकारी था जिसने इस तरह की भाषा का प्रयोग किया। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया गया, तो वह न्याय के लिए हाईकोर्ट का रुख करेंगे।
संघर्षों से रहा अलंकार अग्निहोत्री का नाता
प्रशासनिक विवादों से इतर, अलंकार अग्निहोत्री का निजी जीवन संघर्ष और मेहनत की मिसाल रहा है। मूल रूप से कानपुर के रहने वाले अलंकार ने बेहद कम उम्र में अपने पिता को खो दिया था। महज साढ़े दस साल की उम्र में पिता के निधन के बाद परिवार की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई थी। उनकी मां गीता अग्निहोत्री ने कठिन हालात में भी बच्चों की शिक्षा और परवरिश में कोई कमी नहीं आने दी।
अलंकार पढ़ाई में शुरू से ही प्रतिभाशाली रहे। उन्होंने यूपी बोर्ड की इंटरमीडिएट परीक्षा में प्रदेश स्तर पर 21वां स्थान हासिल किया था। इसके बाद उन्होंने आईआईटी-बीएचयू से मेटलर्जिकल इंजीनियरिंग में बी-टेक की पढ़ाई पूरी की। सिविल सेवा उनका सपना था, लेकिन पारिवारिक जिम्मेदारियों के चलते उन्होंने पहले निजी क्षेत्र में नौकरी की। आईटी कंपनी में कंसल्टेंट के रूप में काम करते हुए उन्होंने अपने छोटे भाई-बहनों को आत्मनिर्भर बनाया।
प्राइवेट नौकरी छोड़कर की थी पीसीएस परीक्षा की तैयारी
परिवार की स्थिति स्थिर होने के बाद उन्होंने नौकरी छोड़कर पीसीएस की तैयारी शुरू की और पहले ही प्रयास में सफलता हासिल कर डिप्टी कलेक्टर बने। अपनी इस सफलता का श्रेय वह हमेशा अपनी मां और पत्नी आस्था मिश्रा को देते रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया था कि परीक्षा की तैयारी के लिए उन्होंने पहले से एक साल की पगार बचाकर रखी थी, ताकि परिवार को आर्थिक संकट का सामना न करना पड़े।
कर्मचारी कल्याण सेवा समिति ने की इस्तीफा वासस लेने की मांग
इस पूरे घटनाक्रम के बीच कर्मचारी संगठनों और सामाजिक संगठनों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं। कर्मचारी कल्याण सेवा समिति बरेली कॉलेज के अध्यक्ष जितेंद्र मिश्रा ने अलंकार अग्निहोत्री के इस्तीफे को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए उनसे अपना फैसला वापस लेने की अपील की है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने इस मुद्दे को गंभीरता से नहीं लिया, तो आंदोलन का रास्ता अपनाया जाएगा। फिलहाल, सिटी मजिस्ट्रेट के निलंबन और जांच के आदेश के बाद यह मामला प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर और गहराने के संकेत दे रहा है।