सरकारी भूमि पर कब्जे की जांच के बाद बढ़ा विवाद, दाखिल-खारिज और धमकी के आरोपों पर तहसीलदार ने दी सफाई
अनवर खांन, सहावर।
जागरण टूडे,सहावर।
तहसील सहावर में तैनात तहसीलदार संदीप चौधरी पर जान से मारने की धमकी देने और फर्जी बैनामे का दाखिल-खारिज कराने के लगाए गए आरोपों पर अब उनका पक्ष भी सामने आया है। तहसीलदार ने इन सभी, आरोपों को पूरी तरह निराधार और मनगढ़ंत बताते हुए कहा कि शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोप सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे की जांच से ध्यान भटकाने और प्रशासन पर दबाव बनाने की कोशिश हैं।
तहसीलदार संदीप चौधरी ने बताया कि शिकायतकर्ता अरविंद ने न्यायालय के माध्यम से उनके सहित 10 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। यह मामला वर्तमान में माननीय उच्च न्यायालय में विचाराधीन है तथा इसकी निष्पक्ष जांच पुलिस द्वारा की जा रही है। उन्होंने कहा कि शिकायतकर्ता से उनकी कभी फोन या किसी अन्य माध्यम से बातचीत तक नहीं हुई, ऐसे में धमकी देने का आरोप पूरी तरह निराधार है।
फर्जी बैनामे के दाखिल-खारिज के आरोप पर तहसीलदार ने स्पष्ट किया कि संबंधित दाखिल-खारिज न्यायालय की विधिक प्रक्रिया के तहत किया गया था। उस समय किसी भी पक्ष की ओर से कोई आपत्ति प्रस्तुत नहीं की गई थी। बाद में आपत्ति मिलने पर न्यायालय ने बिना विलंब के संबंधित दाखिल-खारिज आदेश को निरस्त कर दिया।
तहसीलदार के अनुसार, वास्तविक विवाद तब शुरू हुआ जब ग्राम के एक शिकायतकर्ता ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर अरविंद द्वारा सरकारी भूमि पर कब्जा किए जाने की शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के निस्तारण के लिए कराई गई जांच में प्रथम दृष्टया अरविंद तथा एक अन्य व्यक्ति के मकान का कुछ हिस्सा सरकारी भूमि पर पाया गया।
उन्होंने आरोप लगाया कि जांच शुरू होने के बाद से शिकायतकर्ता लगातार प्रशासन पर दबाव बनाने का प्रयास कर रहा है। उनका कहना है कि अरविंद आए दिन तहसील परिसर में बैठकर अधिकारियों को गुमराह करने और कार्रवाई को प्रभावित करने का प्रयास करता है, ताकि सरकारी भूमि पर चल रही जांच प्रभावित हो सके।
तहसील प्रशासन का कहना है कि सरकारी भूमि को अवैध कब्जों से मुक्त कराने का अभियान नियमानुसार जारी रहेगा। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि किसी भी व्यक्ति के दबाव में आकर कार्रवाई प्रभावित नहीं की जाएगी। साथ ही मामले की निष्पक्ष जांच पूरी होने के बाद ही विधिक कार्रवाई आगे बढ़ाई जाएगी।