चार दिन से थाने में अनुमति के इंतजार में सुरक्षित प्रतिमा; भाजपा के विधायक व जिलाध्यक्ष डीएम से मिले,सपा जिलाध्यक्ष का 48 घंटे का अल्टीमेटम,राष्ट्रीय सवर्ण परिषद ने भी जताया विरोध
जागरण टुडे, कासगंज(उदित विजयवर्गीय)
थाना सहावर क्षेत्र के फरौली गांव में भगवान परशुराम की प्रतिमा की स्थापना को लेकर शुरू हुआ विवाद चार दिन बाद भी थमता नजर नहीं आ रहा है। बिना प्रशासनिक अनुमति के प्रतिमा स्थापित किए जाने के बाद प्रशासन ने उसे मौके से हटवाकर सहावर थाने के मंदिर में सुरक्षित रखवा दिया था। अब चार दिन से भगवान परशुराम की प्रतिमा थाने के मंदिर में विराजमान है, जबकि गांव में उनकी स्थापना को लेकर विरोध के स्वर लगातार तेज होते जा रहे हैं। मामला अब प्रशासनिक प्रक्रिया से निकलकर सामाजिक और राजनीतिक बहस का रूप लेता दिखाई दे रहा है।
आपको बता दे विगत बुधवार देर रात फरौली गांव में कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय के गेट के पास ग्राम समाज की जमीन पर बिना अनुमति भगवान परशुराम की प्रतिमा स्थापित किए जाने की सूचना प्रशासन को मिली थी। शिकायत मिलते ही एसडीएम सुशांत सांवरे और सीओ दुर्गेश कुमार मिश्र भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने वहां मौजूद लोगों को समझाकर स्थिति शांत कराई और प्रतिमा को वहां से हटवाकर सहावर थाने के मंदिर में सुरक्षित रखवा दिया।
इस दौरान सीओ दुर्गेश कुमार मिश्र ने तर्क दिया था कि सार्वजनिक स्थान अथवा जमीन पर शासन की अनुमति के बिना किसी भी प्रकार की प्रतिमा स्थापित नहीं की जा सकती। प्रशासन के अनुसार फिलहाल गांव में शांति व्यवस्था कायम है। हालांकि प्रतिमा हटाए जाने के चार दिन बाद भी स्थापना का मामला लंबित रहने से विरोध के स्वर लगातार तेज हो रहे हैं।
सपा जिलाध्यक्ष ने दिया अल्टीमेटम
प्रतिमा की स्थापना को लेकर राजनीतिक विरोध भी सामने आया है। सपा जिलाध्यक्ष ने प्रशासन से फरौली में भगवान परशुराम की प्रतिमा 48 घंटे के भीतर स्थापित कराने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ऐसा नहीं किया गया तो ब्राह्मण समाज के आंदोलन में समाजवादी पार्टी खुलकर साथ देगी।
सपा जिलाध्यक्ष ने कहा कि “ब्राह्मण समाज के महापुरुषों का अपमान बर्दाश्त नहीं होगा।” बयान के बाद मामले में राजनीतिक सरगर्मी और बढ़ गई है।
‘भगवान को भी थाने जाना पड़ सकता है’
मामले को लेकर राष्ट्रीय सवर्ण परिषद (RSP) के चीफ PankajDhavraiyya ने सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए लिखा, “शर्मनाक—UP में भगवान को भी थाने जाना पड़ सकता है।”
उन्होंने आगे कहा कि यदि भगवान परशुराम जी को सम्मान सहित थाने से किसी ब्राह्मण के घर नहीं भेजा गया तो वह कासगंज थाने से अपने भगवान को सम्मान सहित लेने आएंगे। उन्होंने इसे “असहनीय अपमान” बताते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी टैग कर लिखा कि “अब बर्दाश्त नहीं होगा।”
इस बयान के सामने आने के बाद मामला सोशल मीडिया पर भी चर्चा में आ गया है। हालांकि प्रशासन का कहना है कि प्रतिमा को किसी धार्मिक भावना को ठेस पहुंचाने के उद्देश्य से नहीं, बल्कि बिना अनुमति सार्वजनिक/ग्राम समाज की भूमि पर स्थापना किए जाने के कारण हटवाकर सुरक्षित रखा गया है।
जनप्रतिनिधि भी पहुंचे डीएम के दरबार
भगवान परशुराम की प्रतिमा हटाए जाने का मामला अब जनप्रतिनिधियों तक भी पहुंच गया है। अमांपुर विधायक हरिओम वर्मा, सदर विधायक देवेंद्र राजपूत, भाजपा जिलाध्यक्ष नीरज शर्मा और ब्राह्मण सभा के जिलाध्यक्ष गौरीशंकर शर्मा ने जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर डीएम प्रणय सिंह से मुलाकात की और प्रतिमा स्थापना से जुड़े मामले को लेकर ज्ञापन सौंपा।
प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी के समक्ष फरौली में आराध्य भगवान श्री परशुराम की प्रतिमा हटाए जाने को लेकर अपना पक्ष रखा। जनप्रतिनिधियों और ब्राह्मण सभा के पदाधिकारियों ने प्रतिमा की स्थापना से संबंधित स्थिति पर जिलाधिकारी से विस्तार से वार्ता की और अपनी मांग रखी।
बताया गया कि मुलाकात के दौरान जिलाधिकारी प्रणय सिंह ने प्रतिनिधिमंडल को मामले में नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई किए जाने का आश्वासन दिया। जिलाधिकारी के आश्वासन के बाद प्रतिनिधिमंडल ने मामले के समाधान की उम्मीद जताई।
एक तरफ नियम, दूसरी तरफ सम्मान की मांग
सहावर के फरौली प्रकरण में अब दो अलग-अलग पक्ष सामने हैं। प्रशासन का कहना है कि सार्वजनिक अथवा ग्राम समाज की जमीन पर प्रतिमा स्थापना के लिए निर्धारित अनुमति और प्रक्रिया जरूरी है। वहीं विरोध करने वाले लोग भगवान परशुराम की प्रतिमा को जल्द से जल्द सम्मानपूर्वक स्थापित किए जाने की मांग कर रहे हैं।
चार दिन से प्रतिमा थाने के मंदिर में सुरक्षित है और बाहर उसकी स्थापना को लेकर विरोध बढ़ रहा है। अब निगाह प्रशासन की अनुमति प्रक्रिया और अगले फैसले पर टिकी है। यदि निर्धारित समय में कोई निर्णय नहीं हुआ तो 48 घंटे के अल्टीमेटम के बाद आंदोलन का रुख क्या होगा, यह भी देखने वाली बात होगी।
फिलहाल प्रशासन के सामने चुनौती साफ है कि नियमों का पालन भी हो और मामले को लेकर बढ़ रहे सामाजिक आक्रोश को भी शांत रखा जाए। लेकिन अब गांव फरौली में भगवान परशुराम की प्रतिमा का यह विवाद अब गांव की सीमा से निकलकर राजनीतिक और सोशल मीडिया बहस का मुद्दा बन चुका है।