Saturday, September 12, 2026

एसपी का डिजिटल पहरा: रात की गश्त में सोने वाले सिपाहियों की अब खैर नहीं

लेखक: Jagran Today | Category: उत्तर प्रदेश | Published: September 1, 2026

एसपी का डिजिटल पहरा: रात की गश्त में सोने वाले सिपाहियों की अब खैर नहीं

जागरण टुडे, शाहजहांपुर

 रात की गश्त के नाम पर खानापूर्ति करने और ड्यूटी के दौरान आराम फरमाने वाले पुलिसकर्मियों पर अब डिजिटल निगरानी का शिकंजा कसने जा रहा है। एसपी सौरभ दीक्षित ने रात्रि गश्त को प्रभावी और जवाबदेह बनाने के लिए नई व्यवस्था लागू की है। इसके तहत पुलिसकर्मियों की मौजूदगी पर नजर रखने के लिए शहर से लेकर गांवों तक क्यूआर कोड लगाए जाएंगे।

मंगलवार से शुरू होने वाली इस व्यवस्था के तहत शहर के 15 अतिसंवेदनशील मोहल्लों के अलावा जिले की सभी 1068 ग्राम पंचायतों में क्यूआर कोड लगाए जा रहे हैं। रात्रि गश्त में तैनात पुलिसकर्मियों को निर्धारित स्थान पर पहुंचकर अपने मोबाइल फोन से क्यूआर कोड स्कैन करना अनिवार्य होगा।

क्यूआर कोड शहर के अतिसंवेदनशील मोहल्लों के चौराहों और अन्य प्रमुख सार्वजनिक स्थानों पर लगाए जाएंगे। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायत भवन, स्कूल और प्रमुख सार्वजनिक स्थलों को क्यूआर कोड लगाने के लिए चिह्नित किया जा रहा है।

स्कैन होते ही कंट्रोल यूनिट को मिलेगा अलर्ट

पुलिसकर्मी के निर्धारित स्थान पर पहुंचकर क्यूआर कोड स्कैन करते ही उसके मोबाइल नंबर के साथ कंट्रोल यूनिट को अलर्ट प्राप्त होगा। इससे पुलिस अधिकारियों को तत्काल जानकारी मिल जाएगी कि गश्त करने वाला सिपाही निर्धारित स्थान पर पहुंचा है या नहीं।

अगर कोई पुलिसकर्मी निर्धारित क्यूआर कोड स्कैन नहीं करता है तो उसकी गश्त को लेकर सवाल उठेगा। ऐसी स्थिति में संबंधित पुलिसकर्मी से जवाब-तलब किया जा सकेगा। इससे रात्रि गश्त की वास्तविक स्थिति की निगरानी वरिष्ठ अधिकारी कर सकेंगे।

जियो टैगिंग से फर्जीवाड़े पर लगेगी रोक

क्यूआर कोड को जियो टैगिंग से जोड़ा गया है। कोड स्कैन करते समय पुलिसकर्मी की लोकेशन भी सामने आएगी। ऐसे में केवल क्यूआर कोड की फोटो मोबाइल में रखकर दूसरे स्थान से स्कैन करने या घर बैठे गश्त पूरी दिखाने की कोशिश करना आसान नहीं होगा।

लोकेशन की जानकारी मिलने से अधिकारी यह भी जांच सकेंगे कि सिपाही वास्तव में निर्धारित गश्ती स्थल पर पहुंचा था या नहीं। इस व्यवस्था का उद्देश्य रात्रि गश्त में लापरवाही पर अंकुश लगाने के साथ ही पुलिसकर्मियों की जवाबदेही तय करना है।

गांवों में भी डिजिटल निगरानी

अब तक रात्रि गश्त की निगरानी मुख्य रूप से अधिकारियों की रिपोर्ट और आकस्मिक जांच पर निर्भर रहती थी। नई व्यवस्था लागू होने के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में भी गश्त की डिजिटल निगरानी संभव होगी। जिले की सभी 1068 ग्राम पंचायतों को इसमें शामिल किए जाने से पुलिस की रात्रि गश्त का दायरा काफी व्यापक हो जाएगा।

एसपी सौरभ दीक्षित की इस पहल से पुलिसकर्मियों को निर्धारित रूट और स्थानों पर नियमित गश्त करने के लिए जवाबदेह बनाया जाएगा। खासतौर पर अतिसंवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस की मौजूदगी सुनिश्चित करने में यह व्यवस्था महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

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