गंजडुंडवारा नगर पालिका प्रशासन द्वारा मई में लाखों रुपये खर्च कर लगाया गया था, शुरुआत में सिर्फ एक बार गूंजी आवाज; आईजीआरएस शिकायत के बाद अचानक चौराहों पर बजने लगे देशभक्ति के गीत
जागरण टुडे, कासगंज(उदित विजयवर्गीय)
गंजडुंडवारा। नगर में आपदा और आपात परिस्थितियों के दौरान आमजन तक तत्काल सूचना पहुंचाने के उद्देश्य से लाखों रुपये खर्च कर लगाया गया पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम आखिरकार कुंभकर्णी नींद से जाग गया। लंबे समय से खामोश पड़े सिस्टम से गुरुवार को अचानक देशभक्ति के गीत गूंजने लगे। चौराहों पर लगे लाउडस्पीकरों से आवाज सुनकर जहां कस्बावासी चौंक गए, वहीं सिस्टम के अचानक सक्रिय होने को लेकर नगर में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया।
खास बात यह है कि सिस्टम के संचालन को लेकर जहाँ जनप्रतिनिधि ने आवाज उठाना जरूरी नही समझा तब एक कस्बावासी द्वारा आईजीआरएस के माध्यम से शिकायत किए जाने के बाद यह आवाज सुनाई दी है। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या शिकायत के बाद ही नगर पालिका की यह व्यवस्था जागी है।
लाखों खर्च, फिर छा गया था सन्नाटा
शासन के निर्देश पर नगर निकायों में आपदा प्रबंधन और नागरिक सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम स्थापित किए गए थे। इसी क्रम में गंजडुंडवारा नगर पालिका परिषद की ओर से मई माह में नगर के सात प्रमुख और अत्यधिक व्यस्त स्थानों पर यह सिस्टम स्थापित कराया गया था।
नगर पालिका परिसर, बान मंडी तिराहा, राजाराम चौराहा, पटियाली तिराहा, हनुमानगढ़ी चौराहा समेत अन्य प्रमुख सार्वजनिक स्थानों पर लाउडस्पीकर लगाए गए थे। सिस्टम लगने के बाद नगरवासियों को उम्मीद थी कि आपात स्थिति में अब किसी भी जरूरी सूचना को चंद मिनटों में पूरे कस्बे तक पहुंचाया जा सकेगा।
लेकिन सिस्टम स्थापित होने के बाद यह उम्मीद ज्यादा दिनों तक कायम नहीं रह सकी। नगरवासियों के मुताबिक शुरुआत में सिर्फ एक बार इसकी आवाज सुनाई दी और उसके बाद लंबे समय तक चौराहों पर लगे लाउडस्पीकर खामोश नजर आए।
पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम का उद्देश्य केवल लाउडस्पीकर लगाकर उन्हें चौराहों पर टांग देना नहीं था। इसकी वास्तविक उपयोगिता आपदा और आपात परिस्थितियों में सामने आनी थी।
तेज आंधी, अतिवृष्टि, बिजली गिरने की आशंका, आगजनी अथवा अन्य आकस्मिक घटनाओं के दौरान लोगों को समय रहते चेतावनी देना, स्वास्थ्य शिविरों और टीकाकरण की जानकारी देना, स्वच्छता अभियान की सूचना, यातायात डायवर्जन, कानून-व्यवस्था संबंधी संदेश और शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी आमजन तक पहुंचाना इस व्यवस्था के प्रमुख उद्देश्यों में शामिल था।
ऐसे में लंबे समय तक सिस्टम के खामोश रहने पर सवाल उठे कि जब लाखों रुपये खर्च कर व्यवस्था स्थापित की गई है और इसका उद्देश्य लोगों को आपदा से पहले सचेत करना है, तो इसका नियमित संचालन और परीक्षण क्यों नहीं किया जा रहा?
शिकायत के बाद गूंज उठे देशभक्ति के गीत
सिस्टम की खामोशी को लेकर आईजीआरएस के माध्यम से शिकायत की गई। शिकायत के बाद अब गुरुवार को अचानक नगर के प्रमुख स्थानों पर लगे पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम से देशभक्ति के गीत सुनाई देने लगे।
चौराहों पर अचानक गूंजती आवाज ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। लंबे समय बाद सिस्टम के सक्रिय होने से लोग एक-दूसरे से पूछते नजर आए कि आखिर यह व्यवस्था अचानक कैसे चल पड़ी।
देशभक्ति के गीतों की आवाज ने जहां सिस्टम के तकनीकी रूप से सक्रिय होने का संकेत दिया, वहीं इसके साथ ही एक बड़ा सवाल भी खड़ा कर दिया—जब शिकायत के बाद सिस्टम चल सकता है तो सामान्य दिनों में इसे नियमित रूप से क्यों नहीं चलाया गया।
असली परीक्षा आपदा के समय होगी
नगरवासियों का कहना है कि देशभक्ति के गीत सुनना अच्छी बात है, लेकिन पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम की असली उपयोगिता किसी गीत या विशेष अवसर पर नहीं, बल्कि आपदा के समय साबित होगी।
यदि अचानक तेज आंधी आने वाली हो, भारी बारिश का खतरा हो, बिजली गिरने की आशंका हो, किसी स्थान पर आग लग जाए या कोई अन्य आपात स्थिति उत्पन्न हो तो क्या सिस्टम तत्काल सक्रिय होकर लोगों को चेतावनी देगा? यही इस व्यवस्था की वास्तविक परीक्षा होगी।
लोगों का कहना है कि आपदा प्रबंधन से जुड़ी ऐसी व्यवस्था को नियमित रूप से टेस्ट किया जाना चाहिए, ताकि जरूरत पड़ने पर तकनीकी खराबी या संचालन संबंधी समस्या सामने न आए।
अब देखना यह है, आवाज रहेगी या फिर लौटेगा सन्नाटा
आईजीआरएस शिकायत के बाद सिस्टम से आवाज सुनाई देने के बाद नगरवासियों को उम्मीद है कि अब इसका नियमित संचालन किया जाएगा। लोगों का कहना है कि शिकायत के बाद व्यवस्था का सक्रिय होना राहत की बात है, लेकिन इसे केवल शिकायत, किसी विशेष अवसर या कार्यक्रम तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए।
नगर पालिका प्रशासन की ओर से पहले बताया गया था कि शासन के निर्देशानुसार प्रमुख चौराहों एवं सार्वजनिक स्थलों पर पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम स्थापित किया गया है। इसका उद्देश्य आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित सूचना प्रसारण के साथ-साथ जनजागरूकता और जनकल्याणकारी संदेशों को प्रभावी ढंग से नागरिकों तक पहुंचाना है।
अब जब शिकायत के बाद चौराहों पर देशभक्ति के गीतों की आवाज सुनाई दी है, तो नगरवासियों की निगाह इस बात पर टिकी है कि क्या यह व्यवस्था आगे भी नियमित रूप से बोलती रहेगी या फिर देशभक्ति गीत खत्म होते ही पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम दोबारा 'साइलेंट मोड' में चला जाएगा?
फिलहाल, चौराहों पर गूंजते देशभक्ति गीतों ने मई में सिस्टम लगाए जाने के बाद से पसरी खामोशी जरूर तोड़ दी है।