न्यायमूर्ति रवींद्र मैठाणी की एकलपीठ में इस मामले की सुनवाई हुई। आरोपी की ओर से अधिवक्ता एवं कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने पैरवी की। जमानत पर सुनवाई से पहले सरकारी वकील मनीषा सिंह राना ने अपील पर सवाल उठाया था। उन्होंने कहा कि यूएपीए जैसे गंभीर मामलों में एनआईए एक्ट के तहत सेशन कोर्ट को विशेष कोर्ट की शक्तियां प्राप्त हैं और सेशन कोर्ट के आदेश को उच्च न्यायालय की एकल पीठ के बजाय खंडपीठ में चुनौती दी जा सकती है।
इसके जवाब में आरोपी की ओर से कहा गया था कि एनआईए एक्ट के तहत यूएपीए जैसे मामलों के लिए स्पेशल कोर्ट का प्रावधान है और सेशन कोर्ट स्पेशल कोर्ट नहीं है। इसलिए एकलपीठ अपील पर सुनवाई कर सकती है। अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद 30 अगस्त को निर्णय सुरक्षित रख लिया था। सोमवार को अदालत ने फैसला सुनाते हुए कहा कि सत्र न्यायालय को विशेष अदालत का अधिकार प्राप्त है और उसके आदेश को डबलबेंच में ही चुनौती दी जा सकती है।