Wednesday, April 1, 2026

चाइल्ड पॉर्न देखना, सेव करना पॉक्सो और आईटी एक्ट के तहत अपराध, सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया फैसला

लेखक: | Category: राष्ट्रीय | Published: September 23, 2024

चाइल्ड पॉर्न देखना, सेव करना पॉक्सो और आईटी एक्ट के तहत अपराध, सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया फैसला
सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने कहा कि बाल पॉर्नोग्राफी देखना और डाउनलोड करना पॉक्सो और आईटी एक्ट के तहत अपराध हैं। पीठ ने चाइल्ड पॉर्नोग्राफी और उसके कानूनी परिणामों पर दिशा-निर्देश जारी किए। 

सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर अपना फैसला दिया। मद्रास हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि चाइल्ड पॉर्नोग्राफी देखना और डाउनलोड करना पॉक्सो और आईटी एक्ट के तहत अपराध नहीं है। 

मद्रास हाईकोर्ट ने 11 जनवरी को 28 वर्षीय युवक के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई रद कर दी थी। युवक पर अपने मोबाइल पर बच्चों से जुड़ी अश्लील सामग्री डाउनलोड करने का आरोप था। मद्रास हाईकोर्ट ने कहा था कि आजकल बच्चे पॉर्नोग्राफी देखने की गंभीर समस्या से जूझ रहे हैं और समाज को इतना परिपक्व होना चाहिए कि वह उन्हें सजा देने के बजाय उन्हें शिक्षित करे। 

सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता संगठनों की पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता एचएस फुल्का की दलीलों पर गौर किया कि हाईकोर्ट का फैसला इस संबंध में कानून के विरोधाभासी है। सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट के उस आदेश को सोमवार को रद कर दिया, जिसमें कहा गया था कि बाल पॉर्नोग्राफी देखना और डाउनलोड करना पॉक्सो व आईटी एक्ट के तहत अपराध नहीं है। 

 वरिष्ठ अधिवक्ता फरीदाबाद में स्थित एनजीओ जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन एलायंस और नई दिल्ली स्थित बचपन बचाओ आंदोलन की ओर से अदालत में पेश हुए। 

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