लखनऊ। प्रदेश सरकार ने विद्यालयों के विलय को लेकर बड़ा निर्णय लिया है। अब तक जहां एक किलोमीटर की परिधि में आने वाले उच्च प्राथमिक विद्यालयों को मर्ज (विलय) करने का आदेश था, वहीं संशोधित आदेश के अनुसार अब तीन किलोमीटर के अंदर आने वाले उच्च प्राथमिक विद्यालयों का विलय किया जाएगा।
गुरुवार को अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार ने आदेश जारी कर बताया कि प्राथमिक विद्यालयों की पेयरिंग पहले की तरह एक किलोमीटर के दायरे में होगी, जबकि परिषदीय उच्च प्राथमिक विद्यालयों की पेयरिंग तीन किलोमीटर के भीतर की जाएगी। आदेश में कहा गया है कि जिन विद्यालयों में छात्रों की संख्या 50 से कम है, उनका नजदीकी विद्यालयों से विलय किया जाए।
अपर मुख्य सचिव ने निर्देश दिया कि मर्जर के दौरान स्थानीय परिस्थितियों और बच्चों की जरूरतों को प्राथमिकता दी जाए। छोटे और कम संसाधनों वाले विद्यालयों को बड़े विद्यालयों से जोड़ा जाए ताकि बच्चों को बेहतर शिक्षा और सुविधाएं मिल सकें। आदेश जारी होने के बाद महानिदेशक स्कूल शिक्षा कंचन वर्मा ने सभी जिलों के बेसिक शिक्षा अधिकारियों को पत्र भेजकर इसके पालन के निर्देश दिए हैं।
पहले एक किमी के अंदर था मर्जर
बता दें कि सरकार ने जून 2025 में अपर्याप्त नामांकन वाले विद्यालयों को मर्ज करने का फैसला लिया था। उस समय एक किलोमीटर की सीमा तय की गई थी। विपक्षी दलों ने इसका कड़ा विरोध किया और सदन में भी यह मुद्दा उठाया गया। तब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और बेसिक शिक्षा मंत्री ने आश्वासन दिया था कि विद्यालयों का विलय केवल उसी स्थिति में होगा जब छात्रों को आवागमन में परेशानी न हो।
संशोधित आदेश में अब उच्च प्राथमिक विद्यालयों की दूरी बढ़ाकर तीन किलोमीटर कर दी गई है। सरकार का मानना है कि इससे संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा और कम संख्या वाले विद्यालयों को बड़े विद्यालयों से जोड़ने से बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलेगी।