ठा. श्रीराधा सनेह बिहारी मंदिर में आयोजित श्री स्वामी हरिदास संगीत सम्मेलन एवं संगीत कला रत्न समारोह में प्रस्तुति देने आए कलाकार पत्रकारों से भी रूबरू हुए। उन्होंने कहा कि भगवान श्री कृष्ण की नगरी में वह प्रस्तुति देने नहीं, बल्कि उनकी सेवा के भाव से आए हैं।
बांसुरी वादक पं. चेतन जोशी ने कहा कि बांसुरी वादकों के आदि गुरु भगवान श्रीकृष्ण हैं। उनकी ख्याति जितनी बांसुरी वादक के रूप में है उतनी ही सुदर्शन चक्र धारी के रूप में है। उन्होंने कहा कि बांसुरी से पवित्र और मधुर दूसरा कोई वाद्य नहीं है। शायद इसीलिए भगवान ने इसको चुना। साथ ही कहा कि वे कान्हा की नगरी में बांसुरी बजाने नहीं बल्कि इसके माध्यम से उनकी सेवा करने आए हैं।
तबला वादक पं. हरी मोहन शर्मा ने कहा कि स्वामी हरिदास जी के उत्सव में प्रस्तुति देने का अवसर एक बार फिर से मिलना उनके लिए सौभाग्य की बात है। उन्होंने कहा कि आज शास्त्रीय संगीत में एक से बढ़कर एक धुरंधर तबला प्लेयर हैं। तबला वादन की देश में भले कम हो लेकिन विदेश में इसकी डिमांड बहुत अधिक है।
कथक नृत्यांगना गुरु रानी खानम ने कहा कि मंदिर परिसर में प्रस्तुति देना हरेक आर्टिस्ट के लिए सौभाग्य की बात है। साथ ही उन्होंने कहा कि शास्त्रीय संगीत का दायरा पहले से कई गुना अधिक बढ़ गया है। हालांकि देखने में आता है कि वर्तमान में पाश्चात्य संगीत ज्यादा और शास्त्रीय संगीत कम है, लेकिन मुझे नहीं लगता कि शास्त्रीय संगीत का प्रभाव कम हो रहा है बल्कि बढ़ ही रहा है। इसमें एकाग्रता व शालीनता को दिखाएं और प्रेम का संदेश दें, यही भाव लेकर यह शास्त्रीय संगीत और नृत्य रहा है।