समाजवादी पार्टी (सपा) के वरिष्ठ नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री आज़म खान को आखिरकार 23 महीने बाद जेल से रिहाई मिल गई। मंगलवार को सीतापुर जेल से रिहा होने के बाद वह काफिला के साथ रामपुर अपने घर के लिए रवाना हो गए। रास्ते में सीतापुर से लेकर रामपुर तक जगह-जगह समर्थकों ने उनका जोरदार स्वागत किया। बरेली जिले में फरीदपुर, झुमका तिराहा और मीरगंज में सपा कार्यकर्ताओं ने फूल-माला पहनाकर स्वागत किया।
आज़म खान ने भी समर्थकों के जोश का जवाब हाथ हिलाकर और मुस्कान के साथ दिया। इस दौरान कार्यकर्ताओं में खासा उत्साह देखने को मिला। सपा नेताओं का कहना है कि आज़म खान की जेल से रिहाई होने से पार्टी को नई ऊर्जा मिलेगी और संगठन और मजबूत होगा। हालांकि, राजनीति के गलियारों में इस बात की चर्चा भी तेज है कि आज़म खान भविष्य में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) का दामन थाम सकते हैं।
कोर्ट के फैसलों से खुला आजम खान की रिहाई का रास्ता
गौरतलब है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 5 दिन पहले जबरन कब्जे के एक मामले में आज़म खान को जमानत दी थी। उसी दौरान रामपुर कोर्ट ने जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े शत्रु संपत्ति मामले में नई धाराएं जोड़ते हुए 20 सितंबर को उन्हें तलब कर लिया था। लेकिन बाद में अदालत ने इन धाराओं को खारिज कर दिया, जिससे उनकी रिहाई का रास्ता साफ हो गया।
आज़म खान के खिलाफ कुल 104 मुकदमे दर्ज हैं, जिनमें से अकेले रामपुर जिले में ही 93 मामले हैं। अब तक सभी मामलों में उन्हें जमानत मिल चुकी है। साल 2022 में भड़काऊ भाषण के मामले में उन्हें दो साल की सजा सुनाई गई थी, जिसके चलते उनकी विधानसभा सदस्यता भी चली गई थी।
फरवरी 2020 में पहली बार गिरफ्तार हुए थे
आज़म खान को फरवरी 2020 में पहली बार गिरफ्तार किया गया था और उन्हें रामपुर जेल भेजा गया। बाद में सुरक्षा कारणों से उन्हें सीतापुर जेल शिफ्ट कर दिया गया। मई 2022 में वे जमानत पर रिहा भी हुए, लेकिन उसी साल अक्टूबर में एक अन्य मामले में सरेंडर करने के बाद उन्हें फिर जेल जाना पड़ा। अब लगभग 23 महीने बाद उनकी रिहाई संभव हो पाई है।
आजम खान के बाहर आते ही बढ़ी सियासी हलचल
आज़म खान की रिहाई के बाद रामपुर और आसपास के इलाकों में सियासी हलचल तेज हो गई है। सपा कार्यकर्ता जहां इसे पार्टी के लिए बड़ी जीत मान रहे हैं, वहीं राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आज़म के अगले कदम पर कई समीकरण बदल सकते हैं। बसपा में जाने की अटकलें लगातार चर्चा में हैं, हालांकि इस पर आज़म खान ने अब तक कोई बयान नहीं दिया है।
आज़म खान की सियासी वापसी से यह साफ है कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में आने वाले दिनों में नए समीकरण देखने को मिल सकते हैं।