ठा. बांकेबिहारी की नगरी में भी गोवर्धन पूजा उत्सव धूमधाम से मनाया गया। प्रमुख मंदिरों व आश्रमों सहित घरों में गोबर व विभिन्न खाद्य पदार्थों के गोवर्धन बनाकर पूजन तथा छप्पनभोग सजाकर श्रीगोवर्धन महाराज को प्रसन्न किया गया।
रमणरेती मार्ग स्थित श्रीकृष्णबलराम (इस्कॉन) मंदिर में भी भारतीय परंपरा के अनुरूप अन्नकूट महोत्सव मनाया गया। जहां ठाकुजी का पंचामृत अभिषेक किया गया। वहीं ब्रज परंपरानुसार गोबर से निर्मित गोवर्धन के साथ ही सूजी का हलुआ, चावल, मेवा व फल आदि से करीब 1000 किलोग्राम का गोवर्धन पर्वत बनाया गया, जिस पर गोवर्धन के कुंड व परिक्रमा आदि धार्मिक स्थलों का स्वरूप सभी के आकर्षण का केंद्र बने रहे।
मंदिर के पुजारियों ने भगवान श्रीकृष्ण-बलराम की विशेष पूजा अर्चना कर शंख व घंटे-घड़ियालों की ध्वनि के मध्य आरती उतारी गई। उत्सव के दौरान मंदिर प्रांगण में हजारों की संख्या में उपस्थित देशी-विदेशी भक्तों ने इस मनोहारी झांकी के दर्शन व पूजन तथा भगवन्नाम संकीर्तन व नृत्य के माध्यम से उत्सव का जमकर आनंद लिया।
ठा. राधादामोदर मंदिर में आयोजित अन्नकूट महोत्सव में ठा. राधादामोदर लाल के समक्ष चावलों से गिर्राज महाराज का स्वरूप बनाया गया एवं छप्पन प्रकार के व्यंजन सजाकर अन्नकूट का प्रसाद लगाया गया। भक्तों ने गिर्राज शिला व छप्पनभोग के दर्शन एवं आरती में भाग लेकर स्वयं को धन्य किया और गोवर्धन महाराज का जयघोष करने लगे, जिससे संपूर्ण मंदिर परिसर जयकारों से गुंजायमान होता रहा।
मंदिर सेवायत आचार्य कृष्ण बलराम गोस्वामी एवं आचार्य पूर्णचंद्र गोस्वामी ने बताया कि मंदिर में स्वयं भगवान श्री कृष्ण के द्वारा दी गई गिर्राज शिला होने के कारण यहां गाय के गोबर के बजाय चावल एवं अन्य व्यंजनों से विशाल गोवर्धन पर्वत तैयार किया जाता है, जिसे बाद में ठाकुर जी का प्रसाद स्वरूप भक्तों में वितरित किया जाता है।