जागरण टुडे, बरेली। डी फार्मा की फर्जी डिग्री देकर गरीब छात्रों से करोड़ों रुपये ठगने के आरोपी और खुसरो इंस्टीटयूट ऑफ मेडिकल साइंस एंड टेक्नोलॉजी कॉलेज के प्रबंधक शेर अली जाफरी ने खुद को बचाने के लिए हरी टोपी ओढ़ ली है। बताते हैं कि वह एक किसान नेता से साठगांठ करके किसान एकता संघ के पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष बन गए हैं। यही नहीं, वह लोगों की नजर में पाक साफ बनने के लिए कार्यक्रम आयोजित कर खुद को सम्मानित भी करा रहे हैं। हालांकि जानकारों का कहना है कि किसान नेता का चोला ओढ़ने से उनके खिलाफ चल रही कानूनी कार्रवाई पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
छात्रों को डी फार्मा की फर्जी मार्कशीट देने पर खुली जालसाजी
शेर अली जाफरी ने बरेली समेत कई जिलों में कॉलेज खोल रखे हैं, जिनमें ख़ुसरो मेमोरियल डिग्री कॉलेज, खुसरो इंस्टीटयूट ऑफ मेडिकल साइंस एंड टेक्नोलॉजी कॉलेज आदि हैं। खुसरो कॉलेज में फर्जीवाड़ा किए जाने खुलासा तब हुआ जब छात्रों को फर्जी डिग्री देने का मामला सामने आया था। 02 सितंबर 2024 को मीरगंज के थाना कुल्छा निवासी धर्मेंद्र ने सीबीगंज थाने में खुसरो इंस्टीटयूट ऑफ मेडिकल साइंस एंड टेक्नोलॉजी कॉलेज के प्रबंधक शेर अली जाफरी, उनके बेटे और टीचर तारिक निवासी मीर खां बाबरनगर मीरगंज आदि के खिलाफ धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
सीबीगंज थाने में दर्ज कराए गए थे दो मुकदमे
धर्मेंट का आरोप है उनके बेटे शनि को डी फार्मा कराने का झांसा देकर खुसरो कॉलेज के प्रबंधक और टीचर ने 2 लाख 30 हजार रुपये ले लिए। बाद में उनके बेटे को डी फार्मा की फर्जी मार्कशीट थमा दी गई। उनके बेटे को डी फार्मा की मार्कशीट फर्जी होने की जानकारी तब हुई जब वह नौकरी करने गया। खुसरो कॉलेज में फर्जीवाड़े का मामला मीडिया में उछला तो धमक शासन तक पहुंच गई। शासन के निर्देश पर राजकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज सीबीगंज के प्रधानाचार्य नरेंद्र कुमार ने मामले की जांच की। उन्होंने जांच के दौरान पाया कि खुसरे मेमोरियल पीली कॉलेज में बीफार्मा, डीफार्मा और पैरा मेडिकल कोर्स कराया जा रहा है, जो किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से संबद्ध नहीं है। जांच पूरी करने के बाद शेर अली जाफरी आदि के खिलाफ दूसरा मुकदमा राजकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज के प्रधानाचार्य ने दर्ज कराया था।
सत्ताधारी दल में जगह नहीं मिली तो ओढ़ ली हरी टोपी
फर्जीवाड़ा करने के आरोप में मुकदमे कायम होने के बाद खुसरो कॉलेज के प्रबंधक शेर अली जाफरी, उनके बेटे और अन्य आरोपियों को जेल जाना पड़ा था, जो कई महीने जेल में रहने के बाद जमापत पर बाहर निकले। सूत्रों के अनुसार पुलिस आरोपियों के खिलाफ विवेचना पूरी कर चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। बताते हैं कि जेल से बाहर आने के बाद शेर अली जाफरी अपने दामन पर लगे जालसाजी के दाग मिटाने की कोशिश में जुट गए हैं। शुरूआत में उन्होंने सत्ताधारी राजनीतिक दल में घुसपैठ करने की कोशिश की। कई नेताओं के यहां चक्कर भी लगाए, लेकिन रास्ता नहीं मिला। आखिर में उन्हें हरी टोपी ओढ़ने पड़ी।
शेर अली जाफरी को लेकर किसान नेताओं पर उठ रहे सवाल
बताते हैं कि राजनीतिक दलों से निराश होने के बाद शेर अली जाफरी ने जिले के एक किसान नेता का दामन पकड़ा। उन्हें अपने हिसाब से मैनेज किया, जिसके बाद उन्हें किसान नेता का ताज मिल सका। हाल ही में उपजा प्रेस क्लब में कार्यकम आयोजित कर शेर अली जाफरी को किसान एकता संघ पश्चिमी उत्तर प्रदेश का अध्यक्ष घोषित किया गया। मगर उनके संगठन में शामिल होने से तरह-तरह के सवाल उठ रहे हैं। लोग संगठन के अहम नेताओं पर उंगलियां उठा रहे हैं। कुछ लोग तो इसे “किसानों के साथ विश्वासघात” बता रहे हैं। उनका कहना है कि पहले गरीब छात्रों से करोड़ों रुपये ठगे गए अब गरीब किसान निशाने पर हैं।