शहर में 26 सितंबर को हुए बवाल के मुख्य आरोपी मौलाना तौकीर रज़ा के करीबी माने जाने वाले मोहम्मद आरिफ का तीन मंजिला शोरूम जमीदोज हो गया। बरेली विकास प्राधिकरण (बीडीए) ने रविवार दूसरे दिन बुलडोजर चलाकर उसे पूरी तरह ध्वस्त कर दिया। दो दिनों तक चले इस ऑपरेशन में प्रशासन को भारी मशीनरी और अतिरिक्त बल की मदद लेनी पड़ी। शनिवार को शुरू की गई ध्वस्तीकरण की कार्रवाई इमारत की अत्यधिक मजबूत संरचना के चलते अधूरी रह गई थी, लेकिन रविवार को तेजी और रणनीति के साथ चलाए गए दूसरे चरण में पूरी इमारत ढहा दी गई।
रविवार सुबह करीब 11 बजे बीडीए की टीम पोकलेन मशीन, बुलडोजर और मज़बूत तकनीकी उपकरणों के साथ मौके पर पहुंची। टीम ने लगातार प्रहार करते हुए इमारत के विभिन्न हिस्सों को कमजोर किया। करीब छह घंटे के लंबे अभियान के बाद शाम लगभग साढ़े पांच बजे भवन भराभराकर गिर प पड़ा। इमारत गिरते ही इलाके में धूल का घना गुबार फैल गया, जिससे पीलीभीत बाइपास रोड पर कुछ समय के लिए यातायात बाधित रहा और लोगों को वैकल्पिक मार्गों से गुजरना पड़ा।
पीलीभीत बाइपास पर बने इस तीन मंजिला भवन को मोहम्मद आरिफ ने बिना नक्शा पास कराए अवैध रूप से तैयार कराया था। बीडीए ने वर्ष 2024 में ही अवैध निर्माण पर नोटिस देकर सुनवाई का अवसर दिया था, लेकिन आरोप है कि आरिफ ने अपने प्रभाव के दम पर प्राधिकरण की नोटिसों को नजरअंदाज कर दिया। बार-बार चेतावनी के बावजूद निर्माण नहीं रोका गया, जिसके बाद प्रशासन ने ध्वस्तीकरण प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया।
शनिवार को ध्वस्तीकरण के पहले चरण में तीन बुलडोजर लगाए गए थे, लेकिन इमारत की मजबूती इतनी अधिक थी कि मशीनें उसे गिराने में असफल रहीं। पोकलेन मशीन को एक ही स्थान पर कई बार चोट करनी पड़ी, बावजूद इसके भवन खड़ा रहा। इसके बाद रविवार को अतिरिक्त मशीनरी, तकनीकी विशेषज्ञों और पर्याप्त पुलिस बल के साथ दूसरा चरण शुरू किया गया। इस बार रणनीतिक तरीके से कमजोर पॉइंट्स को निशाना बनाया गया और अंततः इमारत पूरी तरह धराशायी हो गई।
पूरी कार्रवाई के दौरान प्रशासन ने सुरक्षा के मद्देनजर आसपास के आवागमन पर नियंत्रण रखा और भीड़ को दूर रखने के लिए बैरिकेडिंग की। ध्वस्तीकरण पूरा होने के बाद बीडीए अधिकारियों ने कहा कि शहर में किसी भी प्रकार का अवैध निर्माण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और ऐसी कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।