योगी सरकार ने प्रदेश को टीबी मुक्त बनाने के लक्ष्य की ओर नया कदम बढ़ाया है। व्यापक स्क्रीनिंग, घर-घर जांच और संदिग्धों को तत्काल मुफ्त दवाओं एवं पोषण किट उपलब्ध कराए जाने से अभियान ने पूरे प्रदेश में गति पकड़ ली है। बीते एक वर्ष के आंकड़े बताते हैं कि सरकार का फोकस अब केवल असुरक्षित क्षेत्रों तक सीमित नहीं, बल्कि सामान्य इलाकों में भी संक्रमण की बढ़ती दर पर है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप स्वास्थ्य विभाग ने इसकी तैयारी तेज कर दी है।
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जिलाधिकारी अविनाश सिंह के निर्देश पर टीबी रोगियों की जांच और उपचार में बरेली पूरे प्रदेश में अव्वल है। जिला क्षय रोग अधिकारी बरेली ने बताया कि टीबी की व्यापक जांच, मुफ्त इलाज और पोषण सहायता जैसे उपायों ने इस अभियान को मजबूत गति दी है। बरेली सहित प्रभावित जिलों में स्क्रीनिंग और जागरूकता को अब और बड़े स्तर पर बढ़ाया जा रहा है, ताकि 2025-26 तक टीबी मुक्त प्रदेश का लक्ष्य साकार हो सके।
असुरक्षित क्षेत्रों में 2.41 करोड़ लोगों की हुई स्क्रीनिंग
स्वास्थ्य विभाग द्वारा 7 नवंबर 2024 से 1 नवंबर 2025 तक की गई स्क्रीनिंग रिपोर्ट आई है। असुरक्षित क्षेत्रों में 2.41 करोड़ लोगों की जांच में 5,280 में टीबी के लक्षण मिले। वहीं, सामान्य इलाकों में 26.28 लाख जांच में 1.13 लाख लोगों में लक्षण मिले, यहां संक्रमण दर 4 प्रतिशत, यानी स्लम की तुलना में लगभग दोगुनी है। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने सामान्य आबादी की स्क्रीनिंग को लेकर अलर्ट जारी कर दिया।
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जिला क्षयरोग अधिकारी डॉ. इंतजार हुसैन का कहना है कि बरेली में जिन इलाकों में टीबी के रोगी ज्यादा चिन्हित किए गये हैं। रिपोर्ट का विस्तृत विश्लेषण किया जा रहा है कि सामान्य इलाकों में इतने अधिक केस क्यों आये हैं। स्वास्थ्य टीमें जांच कर रोगियों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने, पोषण और मुफ्त दवा के वितरण में लगी हैं। प्रदेश के सामान्य इलाकों में टीबी के लक्षण वाले मरीज मिले हैं। आंकड़ों के मुताबिक बड़े शहरी क्षेत्र संक्रमण की दृष्टि से अधिक संवेदनशील हो गए हैं।
निःशुल्क इलाज, पोषण किट और घर-घर जांच
टीबी मुक्त भारत और उत्तर प्रदेश में अभियान के तहत सभी पॉजिटिव मरीजों को मुफ्त दवा किट, पोषण हेतु निक्षय पोषण सहायता, नियमित होम-विजिट, अस्पताल–सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में त्वरित जांच और संदिग्धों को तत्काल सीबीएनएटीटी टेस्ट की सुविधा दी जा रही है। स्वास्थ्य विभाग ने सामान्य इलाकों में स्क्रीनिंग तेज कर दी है ताकि संक्रमण के छिपे मरीजों को तुरंत उपचार मिल सके।