श्रृंगेरी पीठ के परम पूज्य जगद्गुरू उत्तराधिकारी शंकराचार्य का आगमन 01 दिसंबर सोमवार को रात लगभग 8 बजे श्रीकृष्ण जन्मभूमि में होगा। आगमन के तुरंत बाद हजारों वर्ष पुरानी परंपरा के अनुसार भगवान चन्द्रमोलीश्वर का दिव्य पूजन और अभिषेक होगा, जिसे आदि शंकराचार्य द्वारा निर्धारित विशेष विधि-विधान से सम्पन्न किया जाएगा। इस पूजन के दर्शन दैविक, दैहिक और भौतिक तीनों प्रकार के तापों का शमन कर भगवान शिव की विशेष कृपा प्रदान करने वाले माने जाते हैं।
श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा-संस्थान के सचिव कपिल शर्मा ने बताया कि अगले दिन 02 दिसंबर मंगलवार सुबह जगद्गुरू श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर विराजमान ठाकुरजी के दर्शन, अर्चन और पूजन करेंगे। उसके बाद जन्मभूमि परिसर में स्थित विशिष्ट गौवंश के दर्शन, पूजन एवं आरती में सम्मिलित होंगे। जगद्गुरू सबसे पहले भगवान श्रीके शवदेव का माल्यार्पण कर पूजन करेंगे, तत्पश्चात अष्टभुजा मां योगमाया का विशेष रक्त पुष्पार्चन और गोपनीय मंत्रों से पूजन होगा।
इसके बाद वह श्रीकृष्ण जन्मभूमि के गर्भगृह में अनंतलीला पुरुषोत्तम भगवान श्रीकृष्ण को वेदमंत्रों से पुष्पांजलि अर्पित करेंगे। भागवत भवन में विराजित श्री राधा-कृष्ण युगल सरकार की विशिष्ट आरती और पूजन सम्पन्न होगा। जगद्गुरू अपने शिष्य एस लक्ष्मीनारायणन एवं उनकी पत्नी द्वारा स्थापित स्वर्णमंडित श्रीमद्भागवत का विशेष पूजन-अभिषेक भी करेंगे। यह ग्रंथ दक्षिण भारतीय कारीगरों द्वारा बनवाया गया है, जिसका निर्माण लक्ष्मीनारायणन द्वारा अपनी सेवानिवृत्ति के उपरांत बचत राशि से कराया गया।
02 दिसंबर को शाम 6 बजे लीलामंच पर शंकराचार्य श्रद्धालुओं को दिव्य प्रवचन और आशीर्वचन प्रदान करेंगे। मोक्षदा एकादशी के अवसर पर उसी दिन सुबह 10 बजे श्रीमद्भगवद्गीता का विशेष पूजन, पुष्पार्चन और सस्वर पाठ भी आयोजित होगा। गीता जयंती का विशिष्ट प्रसाद श्रीमद्भगवद्गीता, ठाकुरजी के पीत वस्त्र और विशेष प्रसाद जगद्गुरू के द्वारा 2 दिसंबर को शाम 6 बजे वितरित किया जाएगा।