रात में खाद की बिक्री करने के मामले में अब जनपद के 17 और खाद कारोबारियों पर कार्रवाई की गई है। जिला कृषि अधिकारी की ओर से इन सभी कारोबारियों के उर्वरक बिक्री केंद्रों के लाइसेंस निलंबित कर दिए गए। इन सभी को नोटिस जारी कर तीन दिन में जवाब दाखिल न करने पर लाइसेंस निरस्त करने की चेतावनी दी गई है। बता दें कि इससे पूर्व रात में 50 फीसदी संभार की बिक्री करने वाले 4 उर्वरक बिक्री केंद्रों के लाइसेंस निरस्त किए गए थे।
बता दें 19 नवंबर को भारत सरकार की ओर से उर्वरकों की बिक्री को लेकर समीक्षा की गई थी। समीक्षा के दौरान पाया गया कि जिले के 57 उर्वरक बिक्री केंद्रों द्वारा शाम 8 बजे के बाद उर्वरक बिक्री की गई है। जिसमें 21 उर्वरक विक्रेताओं का 20 फीसदी, 4 उर्वरक विक्रेताओं का कुल उर्वरक बिक्री का 50 फीसदी संभार (स्टॉक) की बिक्री शाम 8 बजे के बाद होना पाई गई। जबकि रात में बिक्री किया जाना औचित्यहीन है। रात में उर्वरक बिक्री पर कालाबाजारी की आशंका के चलते जांच कराई गई। जिला कृषि अधिकारी नरेंद्र पाल के निर्देश पर की गई जांच में 4 उर्वरक बिक्री केंद्रों द्वारा बड़े पैमाने पर रात में उर्वरक बिक्री होना पाया गया।
इस पर जिला कृषि अधिकारी ने बीते दिनों 4 उर्वरक केंद्रों के लाइसेंस निलंबित करते हुए तीन दिन में जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए थे। इधर अब रात में उर्वरक बिक्री करने वाले 17 और उर्वरक बिक्री केंद्रों पर कार्रवाई की गाज गिर गई। जिला कृषि अधिकारी ने मुताबिक गुरु रामदास फर्टीलाइजर्स, जय सांई खाद भंडार, मिस्ती कृषि सेवा केंद्र, रजा खाद भंडार, खालसा एग्रो ट्रेडर्स, एसके एग्रो ट्रेडर्स, शुभ पेस्टीसाइड्स केंद्र, वरुन खाद एंड पेस्टीसाइडस, समर इंटरप्राइजेज, सिद्दीकी ट्रेडर्स, श्रीराम खाद भंडार, मौर्या ब्रादर्स एग्रो ट्रडर्स, राठौर खाद भंडार, कृष्णा खाद भंडार, एमएल राठौर खाद भंडार, गंगवार पेस्टीसाइड्स, राज एग्रो केमिकल का लाइसेंस निलंबित किया गया है।
किस किसान को बेचा उर्वरक, देना होगा जवाब
जारी नोटिस में सभी 17 उर्वरक बिक्री केंद्रों के संचालकों से रात में किन-किन किसानों को खाद की बिक्री की गई और रात में खाद की बिक्री क्यों की गई, इसको लेकर तीन दिन के अंदर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए गए हैं। जिला कृषि अधिकारी नरेंद्र पाल ने बताया कि निर्धारित अवधि के अंदर जवाब दाखिल न करने वाले उर्वरक बिक्री केंद्रों का लाइसेंस निरस्त करते हुए आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत कठोर कार्रवाई करने की चेतावनी दी गई है।