बरेली। हर साल 12 दिसंबर को विश्व भर में यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज डे मनाया जाता है। इस दिन का उद्देश्य यह संदेश देना है कि किसी भी देश, जाति, धर्म या आर्थिक वर्ग से जुड़े हर व्यक्ति को स्वस्थ जीवन का अधिकार मिलना चाहिए। स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और affordability आज भी दुनिया के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है।
नीति आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक देश के 75 प्रतिशत बुजुर्ग एक या अधिक बीमारियों से जूझ रहे हैं, जबकि केवल 18 प्रतिशत के पास ही हेल्थ इंश्योरेंस की सुविधा है। हालांकि 70 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों को आयुष्मान कार्ड में शामिल किए जाने से कुछ राहत जरूर मिली है, लेकिन अभी भी स्वास्थ्य सुरक्षा को व्यापक रूप देना आवश्यक है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार दुनिया भर में हर चार में से तीन व्यक्ति स्वास्थ्य खर्च के कारण आर्थिक दबाव झेल रहे हैं। बढ़ते अस्पताल खर्च और महंगी दवाइयां आम लोगों की जेब पर भारी पड़ रही हैं। करोड़ों लोगों के लिए आज भी गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा एक सपना है।
हाल के वर्षों में हेल्थ इंश्योरेंस पर जीएसटी कम होने से बीमा की मांग बढ़ी है। देश की सरकारी बीमा कंपनियां बुजुर्गों के लिए अलग-अलग योजनाएं चला रही हैं, जैसे—
-
नेशनल सीनियर सिटीजन मेडिक्लेम
-
ओरिएंटल सम्पूर्ण स्वास्थ्य सुरक्षा
-
न्यू इंडिया सिक्स्टी प्लस मेडिक्लेम
-
यूनाइटेड इंडिया फैमिली मेडिकेयर
इसके अलावा कई प्राइवेट इंश्योरेंस कंपनियां और बैंक-टाईअप आधारित हेल्थ कंपनियां भी बाजार में तेजी से सक्रिय हो रही हैं। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि ये कंपनियां केवल पॉलिसी बेचने पर जोर देंगी या क्लेम निपटान में भी पारदर्शिता और तत्परता दिखाएंगी?
यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज डे 2024 की थीम रही—“Health is a Political Choice” (स्वास्थ्य एक राजनीतिक जिम्मेदारी है)।
इसका स्पष्ट संदेश है कि अब सरकार को ऐसी नीतियां विकसित करनी होंगी जिससे हर नागरिक को हेल्थ इंश्योरेंस तक आसान पहुंच मिले और बीमा कंपनियों की जवाबदेही कठोर तरीके से सुनिश्चित की जा सके।
लेखक- संजीव मेहरोत्रा, महामंत्री, बरेली ट्रेड यूनियंस फेडरेशन