गन्ना विभाग में कार्य के प्रति उदासीनता दिखाने वाले सात गन्ना पर्यवेक्षकों पर कार्रवाई करते हुए जिला गन्ना अधिकारी अशर्फी लाल ने उनका नवंबर माह का वेतन रोक दिया है। विभाग ने सभी संबंधित पर्यवेक्षकों से विस्तृत कार्य प्रगति रिपोर्ट तलब की है, ताकि आगे की कार्रवाई निर्धारित की जा सके। इसके साथ ही उन कर्मचारियों की सूची भी मांगी गई है जिन्होंने चीनी मिलों के कार्य में सहयोग नहीं किया।
गन्ना विभाग द्वारा इन दिनों पर्यवेक्षकों को किसानों के प्लॉटों की नियमित जांच, उनसे संवाद बनाए रखने और गन्ना समय पर चीनी मिलों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। विभागीय अधिकारियों ने पिछले माह स्पष्ट कार्य विभाजन किया था जिसमें कुछ पर्यवेक्षकों को सीधे किसानों से संपर्क बनाए रखना था, जबकि कुछ को मिल प्रबंधन के साथ समन्वय करने की जिम्मेदारी दी गई थी।
हाल ही में विभाग ने जब कार्य की समीक्षा की तो पाया गया कि सात पर्यवेक्षकों ने न तो खेतों का निरीक्षण किया और न ही किसान–मिल समन्वय की जिम्मेदारी निभाई। कुछ पर्यवेक्षक तो निर्धारित समय पर चीनी मिलों तक पहुंचे ही नहीं। इस लापरवाही को गंभीर मानते हुए संबंधित पर्यवेक्षकों का वेतन रोकने का आदेश जारी किया गया, जिसके बाद विभाग में हड़कंप की स्थिति बन गई।
जिला गन्ना अधिकारी ने साफ किया कि कार्य में कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि नवंबर से मार्च तक का समय गन्ना क्रय का सबसे महत्वपूर्ण सीजन होता है, ऐसे में पर्यवेक्षकों की जिम्मेदारी और अधिक बढ़ जाती है। किसानों के प्लॉट से लेकर चीनी मिलों तक निरंतर निगरानी उनकी प्रमुख भूमिका है। अधिकारी ने यह भी बताया कि दोनों सरकारी चीनी मिलों पर पर्याप्त गन्ना पहुंच रहा है, लेकिन पर्यवेक्षकों को अपनी जिम्मेदारियों का नियमित निर्वहन करना ही होगा।
इसी बीच जिले की दोनों प्रमुख चीनी मिलों ने अब तक छह लाख क्विंटल से अधिक गन्ना खरीदा है। बिसौली स्थित यदु शुगर मिल ने लगभग 4.61 लाख क्विंटल गन्ने की खरीद की है, जबकि सहकारी चीनी मिल शेखूपुर ने 1.79 लाख क्विंटल गन्ना खरीदा है। इसके अलावा, किसान जिले से बाहर स्थित छह चीनी मिलों पर भी गन्ना भेज रहे हैं, जिनमें हरदोई की मिल द्वारा लगभग दो लाख क्विंटल गन्ना क्रय किया जा चुका है।