योगी सरकार ने बाल विवाह के खिलाफ सबसे बड़ा और सख्त अभियान शुरू किया है। बाल विवाह मुक्त भारत राष्ट्रीय अभियान के तहत प्रदेश में 27 नवंबर 2025 से 8 मार्च 2026 तक 100 दिवसीय विशेष महाअभियान चलाया जा रहा है। इस दौरान जिला, ब्लॉक, ग्राम और वार्ड स्तर तक ऑपरेशन ज़ीरो टॉलरेंस लागू रहेगा।
महिला कल्याण निदेशालय की ओर से जारी आदेश के अनुसार अभियान से जुड़ी हर गतिविधि, कार्यक्रम, कार्रवाई और रिपोर्ट ‘Bal Vivah Mukt Bharat Portal’ पर अनिवार्य रूप से अपलोड की जाएगी। प्रतिदिन की प्रगति रिपोर्ट, फोटो, वीडियो, केस-स्टडी और मीडिया कवरेज को ऑनलाइन दर्ज किया जाएगा। किसी भी स्तर पर लापरवाही सामने आने पर जिला प्रोबेशन अधिकारी और CMPO सीधे जवाबदेह होंगे।
10 हाई-रिस्क वाले जिलों पर खास नजर
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे के आधार पर बाल विवाह की अधिक प्रवृत्ति वाले प्रदेश के 10 जिलों में विशेष फोकस किया गया है। इन जिलों में स्कूल, आंगनबाड़ी, स्वास्थ्य विभाग, पुलिस, पंचायत, नगर निकाय और सामाजिक संगठनों की संयुक्त टीमें मैदान में उतारी गई हैं, ताकि बाल विवाह की हर सूचना पर तत्काल हस्तक्षेप हो सके।
तीन चरणों में चलाया जा रहा अभियान
पहला चरण 31 दिसंबर 2025 तक: स्कूल, कॉलेज और शिक्षण संस्थानों में जागरूकता, छात्र-छात्राओं और शिक्षकों की भागीदारी।
दूसरा चरण: 01 से 31 जनवरी 2026 तक: मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारे, मैरिज हॉल, बैंड-बाजा, कैटरर्स, फोटोग्राफर्स जैसे विवाह से जुड़े सेवा प्रदाताओं को जोड़कर निगरानी।
तीसरा चरण: 01 फरवरी से 8 मार्च तक: ग्राम पंचायत, वार्ड और समुदाय स्तर पर सीधी निगरानी, हाई-रिस्क परिवारों की पहचान और हस्तक्षेप।
प्रतिज्ञा, केस-स्टडी और सम्मान अनिवार्य
अभियान के तहत बाल विवाह विरोधी प्रतिज्ञा कार्यक्रम, सफल हस्तक्षेपों की केस-स्टडी, रोल मॉडल्स की पहचान और बाल विवाह मुक्त ग्राम/वार्ड घोषित करने की प्रक्रिया भी अनिवार्य की गई है। बेहतर कार्य करने वाले पंचायत प्रतिनिधियों, अधिकारियों और समुदाय सदस्यों को जिला व राज्य स्तर पर सम्मानित किया जाएगा।
कानून का कड़ा पालन, एक्शन में प्रशासन
बाल विवाह निषेध अधिनियम-2006, किशोर न्याय अधिनियम-2015 और POCSO अधिनियम-2012 के तहत तत्काल कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। हर रिपोर्टेड मामले पर CMPO द्वारा तुरंत संज्ञान लेकर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।