जनपद में न्यायिक एवं प्रशासनिक व्यवस्थाओं की हकीकत परखने के लिए शुक्रवार को जिला कारागार और राजकीय संप्रेक्षण गृह (किशोर) का संयुक्त और सघन निरीक्षण किया गया। निरीक्षण का नेतृत्व जिला न्यायाधीश विकास कुमार ने किया। उनके साथ अपर जनपद न्यायाधीश प्रथम राम किशोर पांडेय, अपर जिला जज एवं सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सुरेंद्र प्रसाद, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट उत्सव गौरव राज, जिलाधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह तथा वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्लोक कुमार मौजूद रहे।
अधिकारियों ने सबसे पहले जिला कारागार का निरीक्षण किया। इस दौरान बैरकों, पाकशाला, चिकित्सालय और अन्य व्यवस्थाओं का गहन जायजा लिया गया। बंदियों को दिए जा रहे भोजन की गुणवत्ता को मौके पर परखा गया और साफ-सफाई व स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति की समीक्षा की गई। निरीक्षण के दौरान न्यायिक अधिकारियों ने बैरकों में मौजूद बंदियों से सीधे संवाद किया, उनकी समस्याएं सुनीं और संबंधित अधिकारियों को त्वरित निस्तारण के निर्देश दिए।
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने जेल परिसर में रह रहे बच्चों को फ्रूटी, चिप्स, चॉकलेट और बिस्किट का वितरण किया। महिला बैरक का भी विशेष निरीक्षण किया गया, जहां सुरक्षा, स्वच्छता, स्वास्थ्य सेवाओं और मूलभूत सुविधाओं की समीक्षा करते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।
जिला कारागारके बाद न्यायिक व प्रशासनिक अधिकारियों की टीम ने राजकीय संप्रेक्षण गृह (किशोर) का भी निरीक्षण किया। यहां सुरक्षा व्यवस्था, रहन-सहन, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य बुनियादी सुविधाओं का अवलोकन किया गया। अधिकारियों ने संप्रेक्षण गृह में रह रहे किशोरों की देखरेख और संरक्षण से जुड़ी व्यवस्थाओं को और बेहतर बनाने के निर्देश दिए।
निरीक्षण के दौरान जिला प्रोबेशन अधिकारी श्री विकास चन्द्र भी उपस्थित रहे। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि कारागार और संप्रेक्षण गृह में बंदियों व किशोरों के अधिकारों, सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन-स्थितियों से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। यह निरीक्षण व्यवस्था सुधार और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।