राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्राथमिक वर्ग में आज अनुशासन, एकता और सेवा भाव से ओतप्रोत वार्षिकोत्सव का आयोजन किया गया। इस अवसर पर अलग–अलग शाखाओं से जुड़े स्वयंसेवकों ने अपने-अपने गणों के साथ वार्षिकोत्सव मनाते हुए शारीरिक, बौद्धिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का प्रभावशाली प्रदर्शन किया।
प्राथमिक वर्ग में इस समय चार गणों की शाखाएं संचालित हो रही हैं। संघ द्वारा पूर्व निर्धारित निर्देशों के अनुसार इन चारों गणों को अपना-अपना वार्षिकोत्सव अलग-अलग रूप में मनाना था। इसी क्रम में आज सभी गणों ने अपने-अपने वार्षिकोत्सव पूरे उत्साह और संगठनात्मक अनुशासन के साथ संपन्न किए।
वार्षिकोत्सव के दौरान स्वयंसेवकों ने वर्ग में सीखे गए शारीरिक अभ्यासों का प्रदर्शन किया। इनमें दंड चलाना, यष्टी संचालन, योगाभ्यास, पद विन्यास, खेल गतिविधियां और गण समता प्रमुख रहीं। स्वयंसेवकों की एकरूपता, तालमेल और अनुशासन ने दर्शकों को विशेष रूप से प्रभावित किया। उल्लेखनीय बात यह रही कि इन प्रस्तुतियों की तैयारी के लिए मात्र एक दिन का समय दिया गया था, इसके बावजूद शिक्षार्थियों ने बेहतरीन अभ्यास कर उच्च स्तर का प्रदर्शन किया।
कार्यक्रम के दौरान विभिन्न बौद्धिककर्ताओं ने संघ के विचार, उद्देश्य और जीवन में उसके महत्व विषय पर अपने विचार रखे। वक्ताओं ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ समाज में चरित्र निर्माण, राष्ट्रभक्ति और सामाजिक समरसता को मजबूत करने का कार्य करता है। स्वयंसेवकों के जीवन में अनुशासन, सेवा और त्याग का भाव विकसित करना संघ का मुख्य लक्ष्य है।
प्रत्येक वार्षिकोत्सव में एकल गीत और अमृतवचन का आयोजन भी किया गया, जिससे कार्यक्रम में आध्यात्मिक और प्रेरणादायक वातावरण बना रहा। स्वयंसेवकों ने गीतों के माध्यम से राष्ट्र और समाज के प्रति अपने भाव व्यक्त किए। अंत में संघ प्रार्थना के साथ सभी वार्षिकोत्सवों का विधिवत समापन हुआ। कार्यक्रम ने स्वयंसेवकों में संगठन के प्रति समर्पण, आत्मविश्वास और सेवा भावना को और अधिक सुदृढ़ किया।