राष्ट्रीय पशु आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो ने दोनों नस्लों को दिया प्रमाणपत्र
आईवीआरआई ने पशुधन अनुसंधान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। संस्थान की दो प्रमुख गाय नस्लों रोहिलखंडी और वृन्दावनी का पंजीकरण भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के अंतर्गत राष्ट्रीय पशु आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो की ओर से नई दिल्ली स्थित एपी शिंदे हॉल, एनएएससी कॉम्प्लेक्स में आयोजित आयोजित पशु नस्ल पंजीकरण प्रमाणपत्र एवं नस्ल संरक्षण पुरस्कार वितरण समारोह में किया गया। यह प्रमाणपत्र भारत सरकार के केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रदान किया है।
बरेली, बदायूं और पीलीभीत जिलों में पाई जाती है रोहिलखंडी गाय
रोहिलखंडी गाय मुख्यतः उत्तर प्रदेश के बरेली, बदायूं और पीलीभीत जिलों में पाई जाती है। यह सफेद रंग की द्विउद्देशीय नस्ल है, जो प्रतिदिन औसतन पांच लीटर दूध देती है और खेत की जुताई एवं भार वहन में सक्षम है। इसकी प्रजनन क्षमता उत्कृष्ट है और यह रोग प्रतिरोधक क्षमता में भी मजबूत है। वहीं, वृन्दावनी गाय एक सिंथेटिक नस्ल है, जिसे चार विभिन्न नस्लों की क्रॉसब्रीडिंग से विकसित किया गया। इसका औसत दुग्ध उत्पादन प्रति ब्यात 3000-3500 किलोग्राम है।
इसका वितरण बरेली, पीलीभीत, शाहजहांपुर और बदायूं जिलों में किया गया है। इस नस्ल के नर पशु सामान्य बैलों की तुलना में खेत की जुताई और भार वहन में अधिक सक्षम होते हैं, जबकि रोहिलखंडी गाय इस क्षेत्र की गर्मी एवं आर्द्र जलवायु के अनुकूल है और किसान इसे कई पीढ़ियों से पालते आ रहे हैं। इसकी प्रजनन क्षमता उत्कृष्ट है और यह औसतन 8 से 10 ब्यात तक दूध उत्पादन में सक्षम होती है।
गांयों की दोनों नस्लों के पंजीकरण में आईवीआरआई के निदेशक डॉ. त्रिवेणी दत्त के नेतृत्व में डॉ. जीके गौड़, डॉ. रूपसी तिवारी, डॉ. मुकेश सिंह, डॉ. एके एस. तोमर, डॉ. एसके सिंह, डॉ. अनुज चौहान, डॉ. बृजेश कुमार, डॉ. सुब्रत घोष और डॉ. मानस का महत्वपूर्ण योगदान रहा। डा. त्रिवेणी दत्त ने बताया कि इस पंजीकरण से न केवल इन नस्लों के संरक्षण और विकास को बल मिलेगा, बल्कि किसानों के लिए आर्थिक अवसर और पशुपालन क्षेत्र में स्थायी प्रगति सुनिश्चित होगी।