देवरनियाँ।केंद्र और राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी स्वच्छ भारत मिशन की हकीकत देवरनियाँ नगर पंचायत में ज़मीन पर बिखरी धूल और जंग खाती मशीनें खुद बयां कर रही हैं। नगर पंचायत में लाखों रुपये की लागत से स्थापित मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी (एमआरएफ) सेंटर आज उपेक्षा का शिकार होकर खुद कबाड़ में तब्दील होता नजर आ रहा है।
स्वच्छता मिशन के तहत बनाए गए इस एमआरएफ सेंटर का उद्देश्य था—कस्बे से निकलने वाले कूड़े का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण, कचरे की छंटाई कर पुनर्चक्रण योग्य सामग्री को अलग करना और नगर को साफ-सुथरा बनाना। लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट है। केंद्र में रखी गई महंगी मशीनें वर्षों से बंद पड़ी हैं, जिन पर धूल की मोटी परत जम चुकी है।
मशीनों के निष्क्रिय रहने का नतीजा यह है कि कस्बे के विभिन्न मोहल्लों में जगह-जगह कूड़े के ढेर लगे हुए हैं। एमआरएफ सेंटर के आसपास, विशेषकर मुड़िया-सिंगतरा रोड पर गंदगी का अंबार बना रहता है, जिससे राहगीरों और स्थानीय लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
स्थिति और भी गंभीर तब हो जाती है जब नगर पंचायत द्वारा समय-समय पर इस कूड़े को नियमों के विपरीत जलाया जाता है, जिससे वातावरण प्रदूषित हो रहा है और लोगों के स्वास्थ्य पर भी खतरा मंडरा रहा है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जब सरकार ने लाखों रुपये खर्च कर मशीनें और केंद्र तैयार किया है, तो फिर गंदगी क्यों फैल रही है? लोगों के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि कहीं यह पूरी परियोजना कागजों तक सीमित और भ्रष्टाचार की भेंट तो नहीं चढ़ गई।
इस संबंध में नगर पंचायत देवरनियाँ के ईओ अंकित गंगवार से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनके फोन पर संपर्क नहीं हो सका।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि एमआरएफ सेंटर को तत्काल चालू कराया जाए, मशीनों का सही उपयोग हो और स्वच्छता मिशन को दोबारा पटरी पर लाया जाए, ताकि देवरनियाँ को गंदगी से निजात मिल सके।