जागरण टुडे, सोरों (कासगंज)।
भारत सरकार द्वारा लागू किए गए यूजीसी कानून के विरोध में घोषित भारत बंद का असर रविवार को सोरों नगर में साफ तौर पर देखने को मिला। भारत बंद के आह्वान के तहत सोरों का संपूर्ण बाजार पूरी तरह बंद रहा। सुबह से ही दुकानों के शटर गिरे रहे और आमतौर पर चहल-पहल से भरे रहने वाले बाजारों में सन्नाटा पसरा रहा। मुख्य सड़कों से लेकर गलियों तक लोगों की आवाजाही बेहद कम दिखाई दी।
भारत बंद के चलते आवश्यक वस्तुओं की दुकानें भी अधिकतर बंद रहीं, जिससे आम नागरिकों, विशेषकर जरूरतमंदों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। दवा, दूध, सब्जी और रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़े सामान के लिए लोगों को इधर-उधर भटकना पड़ा। कई लोगों ने मजबूरी में दूरस्थ क्षेत्रों से सामान जुटाया, जबकि कुछ को खाली हाथ लौटना पड़ा।
बंद के दौरान सोरों में किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली। सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर प्रशासन और पुलिस बल सतर्क नजर आया। प्रमुख चौराहों और संवेदनशील स्थानों पर पुलिसकर्मी तैनात रहे, ताकि शांति व्यवस्था बनी रहे और किसी भी तरह की अफरातफरी न हो।
भारत बंद का समर्थन कर रहे लोगों का कहना था कि केंद्र सरकार द्वारा लाया गया यूजीसी कानून शिक्षा व्यवस्था, शिक्षकों और छात्रों के हितों के खिलाफ है। उनका आरोप है कि यह कानून शिक्षा को निजीकरण की ओर धकेलने वाला और आम विद्यार्थियों के भविष्य के लिए घातक है। प्रदर्शनकारियों ने इस कानून को “काला कानून” बताते हुए सरकार से इसे तत्काल वापस लेने की मांग की।
स्थानीय नागरिकों का कहना था कि वे बंद के समर्थन में हैं, लेकिन सरकार को चाहिए कि वह जनहित को ध्यान में रखते हुए इस कानून पर पुनर्विचार करे। वहीं कुछ लोगों ने बंद से हो रही परेशानियों को लेकर भी नाराजगी जताई, खासकर उन लोगों ने जिन्हें दवा या अन्य आवश्यक सेवाओं की तत्काल जरूरत थी।
कुल मिलाकर भारत बंद का सोरों में व्यापक असर देखने को मिला और पूरा नगर दिनभर बंद के साए में रहा।