विश्व वेटलैंड्स दिवस के अवसर पर आगरा–मथुरा सीमा पर स्थित जोधपुर झाल वेटलैंड में पर्यावरण संरक्षण और सांस्कृतिक सरोकारों को जोड़ता एक दिवसीय जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य वेटलैंड्स के संरक्षण, जैव विविधता के महत्व और प्रवासी पक्षियों की भूमिका को आमजन तक प्रभावी ढंग से पहुंचाना रहा।
इस अवसर पर उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद एवं वन विभाग के अधिकारियों को जोधपुर झाल वेटलैंड पर बर्ड वॉचिंग कराई गई। अधिकारियों ने विभिन्न प्रवासी पक्षियों की प्रजातियों का अवलोकन करते हुए वेटलैंड की पारिस्थितिकी को समझा।
कार्यक्रम के दौरान इकोलॉजिस्ट डॉ. केपी सिंह ने फील्ड विजिट कराते हुए बताया कि जोधपुर झाल वेटलैंड प्रवासी पक्षियों के माइग्रेशन में अहम भूमिका निभाता है। यह वेटलैंड सैकड़ों किलोमीटर दूर से आने वाले पक्षियों के लिए सुरक्षित विश्राम और भोजन स्थल उपलब्ध कराता है।
कार्यक्रम में जीजीआईसी स्कूल फरह, ऋषिकुल स्कूल और सूरज गोविंद स्कूल सहित विभिन्न विद्यालयों के विद्यार्थियों ने चित्रकला प्रतियोगिता में भाग लिया। बच्चों ने अपनी कलाकृतियों के माध्यम से जल संरक्षण, जैव विविधता और पक्षियों के महत्व को रचनात्मक ढंग से प्रस्तुत किया। विजयी प्रतिभागियों को मुख्य अतिथियों द्वारा मोमेंटो देकर सम्मानित किया गया। बीआरडीएस संस्था की ओर से वेटलैंड और जैव विविधता विषय पर एक फोटो प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसने आगंतुकों को प्रकृति संरक्षण के प्रति जागरूक किया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद के उपाध्यक्ष शैलजाकांत मिश्र ने कहा कि वेटलैंड्स केवल पर्यावरणीय संसाधन नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक विरासत का भी अभिन्न हिस्सा हैं।परिषद के मुख्य कार्यपालक अधिकारी सूरज पटेल ने जोधपुर झाल वेटलैंड के संरक्षण प्रयासों की सराहना करते हुए इसे ब्रज क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।
प्रभागीय निदेशक सामाजिक वानिकी, मथुरा (डीएफओ) वेंकट श्रीकर पटेल ने कहा कि जोधपुर झाल वेटलैंड के वैधानिक संरक्षण से जुड़े कार्यों में तेजी लाई जाएगी, ताकि इसकी प्राकृतिक संरचना और जैव विविधता सुरक्षित रह सके।
कार्यक्रम का संचालन क्षेत्रीय वनाधिकारी अतुल तिवारी ने किया। इस अवसर पर पर्यावरण सलाहकार, वन विभाग के अधिकारी, शिक्षक, विद्यार्थी, ग्राम प्रधान और पर्यावरणविद् बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।