Tuesday, March 31, 2026

KASGANJ:पटियाली रिश्वत कांड मामला फिर गरमाया:पीड़ित सर्राफा व्यापारी ने डीजीपी से लगाई गुहार,आरोपित पुलिसकर्मियों पर मुकदमा वापस लेने एवं जांच में खुलेआम घालमेल के लगाए आरोप

लेखक: udit kumar | Category: उत्तर प्रदेश | Published: February 3, 2026

KASGANJ:पटियाली रिश्वत कांड मामला फिर गरमाया:पीड़ित सर्राफा व्यापारी ने डीजीपी से लगाई गुहार,आरोपित पुलिसकर्मियों पर मुकदमा वापस लेने एवं जांच में खुलेआम घालमेल के लगाए आरोप

जागरण टुडे,कासगंज। जनपद में पुलिस की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। थाना पटियाली में दर्ज सर्राफा व्यापारी अपहरण व अवैध वसूली प्रकरण अब एक नए और बेहद गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। क्यों कि अब पीड़ित सर्राफा व्यापारी अजय कुमार वर्मा ने आरोप लगाया है कि जिन पुलिसकर्मियों पर अपहरण और वसूली जैसे संगीन आरोप हैं, वही अब उस पर मुकदमा वापस लेने का दबाव बना रहे हैं। इतना ही नहीं, पूरे मामले की विवेचना मे पुलिस द्वारा जानबूझकर घालमेल कर दोषियों को बचाने की कोशिश की जा रही है।

नामजद पुलिसकर्मियों को बचाने की साजिश का आरोप

पीड़ित का कहना है कि उसने अपनी शिकायत में जिन वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के नाम स्पष्ट रूप से दर्ज कराए थे, उन्हें एफआईआर में जानबूझकर अज्ञात दर्शाया गया। विवेचना के दौरान भी थाना प्रभारी और एसओजी प्रभारी जैसे नामजद आरोपियों के नाम हटाने का प्रयास लगातार किया गया। पीड़ित का आरोप है कि यह कोई प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि प्रभावशाली पुलिसकर्मियों को कानूनी शिकंजे से बाहर रखने की सुनियोजित साजिश है।

जांच में आरोप सही, फिर भी आधी-अधूरी कार्रवाई

गौरतलब है कि मुकदमा संख्या 322/2025 दर्ज होने के बाद कराई गई गोपनीय जांच में आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए गए थे। इसके बाद थाना प्रभारी रामवकील सिंह, एसओजी प्रभारी विनय शर्मा सहित चार पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया था। लेकिन हैरानी की बात यह है कि कुछ समय बाद एसओजी प्रभारी व इंस्पेक्टर को बहाल कर दिया गया, जबकि केवल दो आरक्षियों को जेल भेजकर पूरे मामले को हल्का करने का प्रयास किया गया।

अब मुकदमा वापस लेने की धमकी

पीड़ित अजय कुमार वर्मा ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि अब वही आरोपी पुलिसकर्मी, जिन पर गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज है, जनपद में तैनात रहकर खुलेआम दबाव बना रहे हैं। धमकी दी जा रही है कि यदि मुकदमा वापस नहीं लिया गया तो व्यापारी और उसके परिजनों को झूठे मुकदमों में फंसाकर जेल भेज दिया जाएगा। इससे पीड़ित और उसके परिवार की जान-माल को गंभीर खतरा बना हुआ है।

सबूतों से छेड़छाड़ के आरोप

पीड़ित ने विवेचना के दौरान साक्ष्यों से छेड़छाड़ का भी आरोप लगाया है। वसूली गई नकदी और सोने-चांदी के जेवरात की आज तक कोई बरामदगी नहीं दिखाई गई, जबकि यह पूरी रकम पुलिस अभिरक्षा में वसूली गई थी। इससे जांच की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

डीजीपी से हस्तक्षेप की मांग

पीड़ित सर्राफा व्यापारी अजय कुमार वर्मा ने पुलिस महानिदेशक, लखनऊ से शिकायत से पूरे मामले में हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने निष्पक्ष ।जांच करा दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ शीघ्र आरोप पत्र दाखिल कराने तथा स्वयं और अपने परिवार को तत्काल सुरक्षा मुहैया कराए जाने की गुहार लगाई है।

जिस पर प्रकरण को डीजीपी राजीव कृष्ण द्वारा गंभीरता से लेकर सम्बंधितो से 15 दिन में कार्यवाही के सम्बंध मे आख्या मांगी गई है। 

अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी है, कि पटियाली रिश्वत कांड में वास्तव में दोषियों पर कार्रवाई होती है या फिर मामला फाइलों में ही उलझ कर रह जाता है।

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