जागरण टुडे, कासगंज।
जनपद कासगंज की न्यायालय ने सामूहिक बलात्कार के एक चर्चित मामले में बड़ा और अहम फैसला सुनाते हुए तीनों आरोपियों को साक्ष्यों के अभाव में दोषमुक्त कर दिया है। न्यायालय ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे सिद्ध करने में पूरी तरह विफल रहा, इसलिए मात्र आरोप के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।
यह मामला वर्ष 2020 का है, जब थाना सिढपुरा क्षेत्र निवासी सोमवती, निवासी मोहनपुर रोड, द्वारा थाना सिढपुरा में राना सोलंकी, लकी गुप्ता एवं प्रेमचंद जाटव के विरुद्ध सामूहिक बलात्कार, मारपीट एवं धमकी देने के गंभीर आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज कराया गया था। पुलिस ने मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 376 डी, 323, 504, 506, 141 के साथ-साथ अनुसूचित जाति एवं जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धारा 3(2) के अंतर्गत मुकदमा पंजीकृत किया था।
मामले की विवेचना तत्कालीन क्षेत्राधिकारी (सीओ) देवेंद्र पाल गौतम द्वारा की गई। विवेचना पूर्ण होने के उपरांत आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया गया। इसके बाद न्यायालय में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से गवाहों के बयान, चिकित्सकीय साक्ष्य एवं अन्य दस्तावेज प्रस्तुत किए गए।
विचारण के दौरान न्यायालय ने पाया कि अभियोजन पक्ष के गवाहों के बयान आपस में मेल नहीं खाते थे। कई महत्वपूर्ण तथ्यों पर विरोधाभास सामने आया, वहीं चिकित्सकीय एवं परिस्थितिजन्य साक्ष्य भी अभियोजन के दावों की पुष्टि नहीं कर सके। न्यायालय ने यह भी माना कि अभियोजन पक्ष आरोपों को प्रमाणित करने के लिए कोई ठोस एवं विश्वसनीय साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर पाया।
दोनों पक्षों की दलीलें विस्तार से सुनने के बाद न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि आपराधिक मामलों में आरोपों को संदेह से परे सिद्ध करना आवश्यक होता है, जो इस प्रकरण में नहीं हो सका। अभियुक्तों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता केशव मिश्रा ने प्रभावी पैरवी करते हुए सभी कानूनी बिंदुओं को न्यायालय के समक्ष मजबूती से रखा।
अंततः न्यायालय ने सभी तथ्यों और साक्ष्यों पर विचार करते हुए तीनों आरोपियों को दोषमुक्त करने का आदेश पारित किया। फैसले के बाद आरोपियों एवं उनके परिजनों ने राहत की सांस ली। यह निर्णय न्यायिक प्रक्रिया में निष्पक्षता, प्रमाणों की अहमियत और कानून के शासन को रेखांकित करता है।