गुडडू यादव,
जागरण टुडे, कासगंज।
जनपद की कानून-व्यवस्था को मजबूत करने और पुलिसिंग को अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से तेज तर्रार पुलिस अधीक्षक अंकिता शर्मा ने बीते माह 11 अक्टूबर और 30 अक्टूबर को पुलिस महकमे में बड़ा फेरबदल किया था। दो चरणों में जारी तबादला आदेशों के तहत कुल 190 पुलिसकर्मियों के कार्यक्षेत्रों में बदलाव किया गया था। सभी संबंधित पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से नई तैनाती स्थल पर पहुंचकर कार्यभार ग्रहण करने के स्पष्ट निर्देश दिए गए थे।
हालांकि, पुलिस अधीक्षक के इन सख्त आदेशों के बावजूद स्थिति कुछ और ही तस्वीर बयां कर रही है। सूत्रों के अनुसार, तबादले की सूची में शामिल आधे से अधिक पुलिसकर्मी अब भी अपने पुराने तैनाती स्थलों पर ही जमे हुए हैं। न तो उन्होंने नई पोस्टिंग स्थल पर आमद दर्ज कराई है और न ही आदेशों के अनुपालन को लेकर कोई गंभीरता दिखाई जा रही है।
इस स्थिति ने पुलिस महकमे की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। माना जा रहा है कि कुछ पुलिसकर्मी अंदरखाने प्रभाव या अन्य कारणों के चलते तबादला आदेशों को नजरअंदाज कर रहे हैं। इससे न सिर्फ पुलिस अधीक्षक के आदेशों की अवहेलना हो रही है, बल्कि अनुशासन और प्रशासनिक नियंत्रण पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है।
जानकारों का कहना है कि तबादलों का मुख्य उद्देश्य संवेदनशील क्षेत्रों में बेहतर निगरानी, गश्त व्यवस्था को मजबूत करना और पुलिस बल में नई ऊर्जा का संचार करना होता है। लेकिन जब आदेशों का पालन ही न हो, तो ऐसे प्रयासों का उद्देश्य ही विफल हो जाता है।
पुलिस विभाग में अनुशासन सर्वोपरि माना जाता है। ऐसे में वरिष्ठ अधिकारियों के आदेशों की अनदेखी करना गंभीर विषय है। यदि समय रहते इस पर कार्रवाई नहीं की गई, तो इसका गलत संदेश नीचे तक जाएगा।
अब देखना यह है कि पुलिस अधीक्षक अंकिता शर्मा इस मामले को कितनी गंभीरता से लेती हैं और आदेशों का पालन न करने वाले पुलिसकर्मियों पर क्या कार्रवाई होती है। जिले की जनता की नजरें भी पुलिस प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हुई हैं।