जागरण टुडे,कासगंज।
मतदाता सूची शुद्धिकरण (SIR) प्रक्रिया में कथित फर्जीवाड़े को लेकर आज सुप्रीम कोर्ट में एक Intervention Application (हस्तक्षेप याचिका) दाखिल की गई। इस याचिका के माध्यम से SIR प्रक्रिया के दौरान फर्जी फॉर्म भरकर मतदाताओं के नाम काटने की कोशिशों पर रोक लगाने की मांग की गई है। याचिका में सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया गया है कि ऐसे मामलों में कठोर दिशा-निर्देश जारी किए जाएं, ताकि लोकतांत्रिक प्रक्रिया की पवित्रता बनी रहे।
याचिका में विशेष रूप से फॉर्म-7 के दुरुपयोग का मुद्दा उठाया गया है। आरोप है कि कुछ असामाजिक तत्व और राजनीतिक स्वार्थों से जुड़े लोग दूसरों के नाम से फॉर्म-7 भरकर मतदाता सूची से वैध मतदाताओं के नाम हटवाने का प्रयास कर रहे हैं। इससे न केवल आम नागरिकों के मताधिकार पर सीधा हमला हो रहा है, बल्कि चुनावी पारदर्शिता भी प्रभावित हो रही है।
हस्तक्षेप याचिका में मांग की गई है कि चुनाव आयोग को ऐसे फर्जी फॉर्म भरने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए जाएं, ताकि इस तरह की गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके। याचिका में यह भी कहा गया है कि वर्तमान व्यवस्था में पर्याप्त सत्यापन तंत्र के अभाव में फर्जीवाड़े की संभावना बढ़ जाती है, जिससे निर्दोष मतदाता परेशान होते हैं।
एडवोकेट एवं समाजसेवी अब्दुल हफीज गांधी ने इस संबंध में कहा कि SIR प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची को शुद्ध और अद्यतन रखना है, लेकिन यदि इसी प्रक्रिया का दुरुपयोग कर फर्जी तरीके से नाम कटवाए जाएं, तो यह लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप इस मुद्दे पर स्पष्ट और कड़े निर्देश सुनिश्चित करेगा, जिससे भविष्य में इस तरह की अनियमितताओं पर रोक लगेगी।
याचिका में यह भी आग्रह किया गया है कि फॉर्म-7 से संबंधित शिकायतों के निस्तारण में पारदर्शी और समयबद्ध प्रक्रिया अपनाई जाए तथा शिकायतकर्ता और संबंधित मतदाता—दोनों को सुनवाई का अवसर मिले। मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट से इस विषय पर नीतिगत दिशा-निर्देश जारी होने की उम्मीद जताई जा रही है, जिससे देशभर में SIR प्रक्रिया अधिक सुरक्षित और भरोसेमंद बन सके।