बरेली जनपद के मीरगंज तहसील क्षेत्र अंतर्गत मोहल्ला ललितपुरी स्थित श्री बालाजी दरबार, नथपुरा रोड पर सनातन आस्था का भव्य और दिव्य दृश्य देखने को मिला। चालीस दिनों तक चले हनुमान चालीसा व्रत के समापन अवसर पर यहां वैदिक परंपराओं के अनुरूप विशाल हवन यज्ञ, आरती, भोग एवं भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा।
प्रातः काल से ही दरबार परिसर में भक्तों की चहल-पहल शुरू हो गई थी। कार्यक्रम का शुभारंभ संगीत की मधुर धुनों के बीच सुंदरकांड पाठ से हुआ। संपूर्ण वातावरण “जय श्रीराम” और “जय बजरंगबली” के जयकारों से भक्तिमय हो उठा। सुंदरकांड पाठ के उपरांत विद्वान ब्राह्मण पंडित विनय कुमार शर्मा एवं पंडित राजबहादुर शर्मा द्वारा वैदिक वेद मंत्रों के शुद्ध और कुशल उच्चारण के साथ विशाल हवन यज्ञ संपन्न कराया गया।
हवन यज्ञ में यजमान की भूमिका महंत रामकिशोर ने निभाई। हवन कुंड में आहुतियां अर्पित करते हुए श्रद्धालुओं ने अपने परिवार, क्षेत्र एवं राष्ट्र की सुख-समृद्धि और मंगलकामना की। हवन के दौरान भक्तों की आंखों में श्रद्धा और मन में आस्था का भाव स्पष्ट दिखाई दे रहा था। मंत्रोच्चार और धूप-दीप की सुगंध से संपूर्ण परिसर आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण हो गया।
हवन यज्ञ के पश्चात विधिवत आरती और भोग की प्रक्रिया संपन्न की गई। इसके बाद विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें बालाजी भक्तों के साथ-साथ आसपास के क्षेत्र से आए सैकड़ों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। श्रद्धालुओं ने भंडारे में प्रसाद पाकर स्वयं को धन्य महसूस किया और आयोजन की भूरि-भूरि प्रशंसा की।
इस पावन आयोजन का संचालन श्री बालाजी दरबार समिति, नथपुरा रोड मीरगंज, जनपद बरेली के सौजन्य से किया गया। आयोजन को सफल बनाने में समिति के सदस्यों एवं सेवादारों का विशेष योगदान रहा। कार्यक्रम के दौरान सेवा, समर्पण और सहयोग की भावना स्पष्ट रूप से दिखाई दी।
आयोजन में महंत रामकिशोर मौय, सुषमा देवी, विद्वान ब्राह्मण पंडित विनय कुमार शर्मा, पंडित राजकिशोर शर्मा के साथ-साथ सेवादार के रूप में योगेश कुमार गुप्ता, उमेश कुमार, बब्लू मौर्य, टिंकू, ओमकार गंगवार, दीपक, पुष्पा सहित अनेक श्रद्धालु सेवा में जुटे रहे। सभी ने अनुशासन और भक्तिभाव के साथ अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन किया।
स्थानीय श्रद्धालुओं का कहना है कि इस प्रकार के धार्मिक आयोजन समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं और सनातन संस्कृति को मजबूती प्रदान करते हैं। श्री बालाजी दरबार में आयोजित यह कार्यक्रम न केवल आस्था का केंद्र बना, बल्कि सामाजिक समरसता और सेवा भावना का भी सशक्त उदाहरण प्रस्तुत करता नजर आया।