ओमकार गंगवार,मीरगंज (बरेली)
जनपद बरेली का विकास खंड मीरगंज वर्षों पहले ओडीएफ (खुले में शौच मुक्त) घोषित किया जा चुका है, लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल उलट नजर आ रही है। विकास खंड कार्यालय परिसर में बने महिला एवं पुरुष सार्वजनिक शौचालय खुद प्रशासनिक दावों को मुंह चिढ़ाते दिखाई दे रहे हैं। हालत ऐसी है कि लाखों रुपये की लागत से बने ये शौचालय अब “कंडम” घोषित कर दिए गए हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि जब स्वयं खंड विकास अधिकारी कार्यालय परिसर में बने शौचालयों की यह दुर्दशा है, तो विकास खंड के अंतर्गत आने वाली 67 ग्राम पंचायतों में स्वच्छ भारत मिशन के तहत निर्मित शौचालयों की स्थिति कैसी होगी?
जानकारी के अनुसार, वर्ष 2021-22 में 15वें केंद्रीय वित्त आयोग के अंतर्गत इन सार्वजनिक शौचालयों का निर्माण कराया गया था। इनका लोकार्पण क्षेत्रीय सांसद व पूर्व केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार, विधायक डॉ. डी.सी. वर्मा और वर्तमान ब्लॉक प्रमुख गोपाल कृष्ण गंगवार द्वारा तत्कालीन खंड विकास अधिकारी ओमप्रकाश प्रजापति के कार्यकाल में किया गया था। बड़े प्रचार-प्रसार के साथ इसका उद्घाटन हुआ, लेकिन महज चार-पांच वर्षों में ही यह सार्वजनिक शौचालय बदहाल होकर “कंडम” की श्रेणी में पहुंच गया।
वर्तमान स्थिति बेहद चिंताजनक है। शौचालय परिसर में गंदगी का अंबार लगा है। टोंटियां टूटी पड़ी हैं, पानी की कोई व्यवस्था नहीं है और नियमित साफ-सफाई का अभाव साफ दिखाई देता है। बदबू और अव्यवस्था के कारण लोग वहां जाना ही नहीं चाहते। ऐसे में लाखों रुपये की सरकारी धनराशि आखिर कहां और कैसे खर्च हुई, यह जांच का विषय बनता जा रहा है।
इन दिनों ब्लॉक परिसर में भीड़ का दबाव और अधिक बढ़ गया है। विभिन्न गांवों के महिला एवं पुरुष एसआईआर फॉर्म जमा करने के लिए रोजाना सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक सैकड़ों की संख्या में कार्यालय परिसर में मौजूद रहते हैं। ऐसे में सबसे बड़ी समस्या लघु एवं दीर्घ शंका की व्यवस्था को लेकर सामने आती है।
जब सार्वजनिक शौचालय कंडम घोषित कर बंद पड़े हैं, तो दिनभर ब्लॉक में मौजूद रहने वाले लोग आखिर जाएं तो कहां जाएं? मजबूरी में कई लोगों को खुले में शौच जाने का सहारा लेना पड़ता होगा, जो न केवल असुविधाजनक है बल्कि स्वच्छ भारत मिशन की भावना के भी विपरीत है। महिलाओं के लिए यह स्थिति और भी अधिक असहज और चिंताजनक है।
हालांकि, ब्लॉक परिसर में सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) कार्यालय के समीप एक शौचालय बना हुआ है, लेकिन दीर्घ शंका के लिए बना हिस्सा अक्सर ताला बंद रहता है। इससे लोगों की परेशानी कम होने के बजाय और बढ़ जाती है।
इस संबंध में जब मीरगंज के खंड विकास अधिकारी आनंद विजय यादव से दूरभाष पर बातचीत की गई तो उन्होंने स्वीकार किया कि ब्लॉक परिसर में बने सार्वजनिक शौचालय कंडम हालत में हैं। उन्होंने बताया कि महिला एवं पुरुष सहायक विकास अधिकारी के कार्यालय परिसर में बने शौचालय का उपयोग कर सकते हैं। साथ ही उन्होंने आश्वासन दिया कि आगामी बैठक में प्रस्ताव पारित कर नया सार्वजनिक शौचालय निर्माण कराने की कार्यवाही की जाएगी।
लेकिन सवाल अभी भी जस का तस है—क्या 2021-22 में बने शौचालय इतने कम समय में ही जर्जर हो जाने के लिए बनाए गए थे? क्या निर्माण कार्य की गुणवत्ता की कभी जांच हुई? और यदि शौचालय कंडम थे तो उनकी नियमित देखरेख की जिम्मेदारी किसकी थी?
ओडीएफ का तमगा लिए मीरगंज विकास खंड कार्यालय की यह तस्वीर न सिर्फ स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है, बल्कि स्वच्छता अभियान की जमीनी सच्चाई भी उजागर करती है। अब देखना यह होगा कि जिम्मेदार महज प्रस्ताव तक सीमित रहते हैं या फिर वास्तव में जनता को बुनियादी सुविधा उपलब्ध कराई जाती है।