जागरण टुडे, गुड्डू यादव, कासगंज।
जनपद कासगंज स्थित पॉक्सो न्यायालय में मंगलवार को एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया गया। सहावर थाना क्षेत्र से जुड़े एक मामले में अदालत ने साक्ष्यों के अभाव और उनकी विश्वसनीयता पर संदेह व्यक्त करते हुए आरोपी को अधिकांश धाराओं से दोषमुक्त कर दिया, जबकि एक धारा में दोषसिद्धि के बाद परिवीक्षा अधिनियम का लाभ प्रदान किया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, सहावर क्षेत्र निवासी एक व्यक्ति (पीड़िता के पिता) ने वर्ष 2020 में थाना सहावर में मुकदमा संख्या 171/2020 दर्ज कराया था। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि उसकी पुत्री के अश्लील फोटो सोशल मीडिया पर वायरल किए गए तथा उसके साथ छेड़छाड़ की गई। पुलिस ने मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 354ए, 354डी, 341, 504, 506 तथा पॉक्सो एक्ट के तहत रिपोर्ट दर्ज की थी। विवेचना के उपरांत आरोप पत्र विशेष पॉक्सो न्यायालय में दाखिल किया गया।
मामले की सुनवाई विशेष न्यायाधीश पॉक्सो, सुश्री शिखा प्रधान की अदालत में हुई। अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के बयान पर विचार करने के बाद न्यायालय ने पाया कि प्रस्तुत साक्ष्य पूरी तरह विश्वसनीय नहीं हैं। साथ ही, न्यायालय ने पीड़िता को बालिग माना, जिसके आधार पर पॉक्सो एक्ट की धाराएं लागू नहीं मानी गईं।
प्रतिवादी पक्ष के अधिवक्ता केशव मिश्रा
अदालत ने आरोपी आसिफ को धारा 354ए, 341, 504, 506 एवं पॉक्सो एक्ट के आरोपों से दोषमुक्त कर दिया। हालांकि, धारा 354डी (स्टॉकिंग) के तहत दोषसिद्धि होने पर न्यायालय ने आरोपी को दंडित करने के बजाय प्रथम अपराध और परिस्थितियों को देखते हुए परिवीक्षा अधिनियम की धारा 3/4 का लाभ प्रदान किया। अदालत ने उसे एक वर्ष के अच्छे आचरण की शर्त पर रिहा करने का आदेश दिया।
प्रतिवादी पक्ष के अधिवक्ता केशव मिश्रा ने बताया कि अदालत का निर्णय तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर आया है। उन्होंने कहा कि बचाव पक्ष द्वारा प्रस्तुत तर्कों और जिरह के बाद अभियोजन के आरोप सिद्ध नहीं हो सके।
यह निर्णय साक्ष्यों की गुणवत्ता और न्यायिक परीक्षण की महत्ता को रेखांकित करता है।