जागरण टुडे,कसगंज।
जनपद में लूट के एक प्रकरण में केस डायरी समय पर न्यायालय में प्रस्तुत न करने पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) अनुपमा सिंह ने सख्त रुख अपनाया है। मुकदमा संख्या 21/2026, धारा 115(2), 310(2), 317(3) बीएनएस से संबंधित मामले में 18 फरवरी को न्यायालय द्वारा आदेश जारी किया गया। आदेश में संबंधित थाना ढोलना से केस डायरी तलब की गई थी, लेकिन निर्धारित समयावधि के बावजूद केस डायरी न्यायालय में प्रस्तुत नहीं की गई।
न्यायालय ने इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए ढोलना थाना प्रभारी/इंस्पेक्टर को नोटिस जारी किया है। आदेश में कहा गया है कि न्यायालय के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद केस डायरी दाखिल न किया जाना अत्यंत आपत्तिजनक है और न्यायिक प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न करने वाला है। न्यायालय ने संबंधित अधिकारी को निर्देशित किया है कि वह तत्काल प्रभाव से 25 फरवरी 2026 तक हर हाल में केस डायरी न्यायालय में प्रस्तुत करना सुनिश्चित करें।
मामला लूट की घटना से जुड़ा बताया जा रहा है, जिसमें भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत अभियोग पंजीकृत है। केस डायरी किसी भी आपराधिक मामले में महत्वपूर्ण दस्तावेज होती है, जिसके आधार पर न्यायालय विवेचना की प्रगति और साक्ष्यों की स्थिति का अवलोकन करता है। ऐसे में समय पर केस डायरी न भेजे जाने को न्यायालय ने गंभीरता से लिया है।
कानूनी जानकारों का कहना है कि यदि तय तिथि तक केस डायरी प्रस्तुत नहीं की जाती है तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ विभागीय या न्यायिक कार्रवाई भी संभव है। फिलहाल न्यायालय के आदेश के बाद पुलिस विभाग में हलचल मची हुई है और समयसीमा के भीतर अभिलेख प्रस्तुत करने की तैयारी की जा रही है।
इस प्रकरण ने एक बार फिर न्यायालयीय आदेशों के अनुपालन और पुलिस विवेचना की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।