श्रीकृष्ण जन्मभूमि में लठामार होली महोत्सव 27 फरवरी को फाल्गुन शुक्ल रंगभरी एकादशी को अत्यंत उल्लास और परंपरागत तरीके से आयोजित किया जाएगा। इस आयोजन की सभी तैयारियां पूर्ण कर ली गई हैं।
श्रीकृष्ण-जन्मस्थान सेवा संस्थान के सचिव कपिल शर्मा ने बताया कि जन्मस्थान की परंपरागत लठामार होली हर वर्ष की भांति इस बार भी परिसर स्थित केशव वाटिका में आयोजित होगी। कार्यक्रम सांय 4 बजे से आरंभ होगा। ब्रज के प्रसिद्ध फाग गायक, रसिया कलाकार और पारंपरिक नृत्य मंडलियां अपनी प्रस्तुतियों से श्रद्धालुओं को होली के दिव्य रस में सराबोर करेंगी।
इस आयोजन में ब्रज के विभिन्न अंचलों की पारंपरिक होली लीलाओं का समावेश रहेगा। श्रद्धालु होली फाग, रसिया, लोकगीत और नृत्य का जीवंत दर्शन कर सकेंगे। विशेष आकर्षण के रूप में राधारानी के जन्म ग्राम रावल से हुरियारे और हुरियारिनों की सहभागिता रहेगी, जो लठामार होली की अनूठी छटा बिखेरेंगे। जन्मभूमि से जुड़े रसिक भक्त भी इस अवसर पर लीलामय वातावरण का सृजन करेंगे।
केशव वाटिका में पुष्प होली के साथ दिव्य गुलाल की वर्षा की जाएगी। ढोल-नगाड़ों की मंगल ध्वनि और ब्रज के पारंपरिक वाद्यों की ताल पर श्रद्धालु लठामार होली का आनंद लेंगे। संस्थान प्रबंध समिति सदस्य गोपेश्वरनाथ चतुर्वेदी ने बताया कि इस वर्ष विशेष रूप से केसू (टेसू) के फूलों से तैयार प्राकृतिक रंगों का उपयोग किया जाएगा, जिससे भक्त प्रिया प्रियतम को रंग अर्पित कर विशिष्ट आध्यात्मिक आनंद की अनुभूति कर सकेंगे। रंग और गुलाल वर्षा के लिए स्वचालित यंत्रों का प्रयोग भी किया जाएगा, जिससे अधिकाधिक श्रद्धालु सुरक्षित एवं व्यवस्थित ढंग से इस दिव्य आयोजन का आनंद ले सकें।
संस्थान ने मंदिर की मर्यादा बनाए रखने की अपील की है। मंदिर परिसर में अनुशासनहीनता, जूते-चप्पल उछालने या अन्य अमर्यादित आचरण पर पुलिस और प्रशासन के सहयोग से कड़ी कार्रवाई की जाएगी। श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए सामान घरों पर पर्याप्त कर्मचारियों की तैनाती की जा रही है। प्रवेश और निकास की व्यवस्था जन्मभूमि के तीनों द्वारों से रहेगी। प्रशासन की ओर से अनुरोध किया गया है कि श्रद्धालु कोई भी इलेक्ट्रॉनिक या प्रतिबंधित सामान साथ न लाएं, ताकि प्रवेश प्रक्रिया सुगम और शीघ्र हो सके।
संस्थान से जुड़े श्री किशोर भरतिया और श्री अनिलभाई ने बताया कि लगभग 46 वर्षों से जन्मभूमि की यह रंगारंग लठामार होली देश-विदेश के असंख्य भक्तों को दिव्य आनंद प्रदान कर रही है। ब्रज में होली के अवसर पर आयोजित होने वाली अधिकांश प्रमुख लीलाओं का समावेश जन्मभूमि की इस विशेष होली में देखने को मिलता है, जो इसे अद्वितीय बनाता है।