रंगोत्सव के तहत बुधवार को ब्रज में होली का उल्लास चरम पर पहुंच गया। बरसाना की विश्वप्रसिद्ध लठामार होली ने श्रद्धालुओं और पर्यटकों को अनूठा अनुभव कराया। राधारानी की नगरी “राधे-राधे” के जयघोष से गूंज उठी और रंग-गुलाल की बौछारों के बीच परंपरा और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला।
ब्रज परंपरा के अनुसार लड्डू होली के दूसरे दिन नंदगांव से आए हुरियारों का बरसाना की गोपियों ने लठों से स्वागत किया। तंग गलियों में ढालों की ठक-ठक और लाठियों की गूंज के बीच हुरियारे रंगों में सराबोर नजर आए। दर्शक छतों और गलियों से इस अद्वितीय परंपरा के साक्षी बने। देश-विदेश से आए पर्यटक इस अलौकिक दृश्य को अपने कैमरों में कैद करते दिखे।
इस बार रंगोत्सव में सांस्कृतिक कार्यक्रम विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद के तत्वावधान में विभिन्न मंचों पर पारंपरिक होली गीत, रसिया, भजन और लोकनृत्य प्रस्तुत किए गए। श्री राधा बिहारी इंटर कॉलेज समेत कई स्थानों पर कलाकारों ने भक्तिरस से ओतप्रोत प्रस्तुतियां दीं।
प्रख्यात कलाकार अभिलाषा वर्मा, बनवारी लाल शर्मा, दीपिका शर्मा, जीतेन्द्र कुमार और कैलाश पियूष ने अपनी टीम के साथ ब्रज की लोकसंस्कृति को जीवंत किया। ढोलक, मंजीरा और हारमोनियम की धुन पर जब रसिया गूंजे तो श्रद्धालु भी झूम उठे। गलियों और चौपालों पर स्ट्रीट परफॉर्मेंस ने उत्सव को और विस्तार दिया।
लट्ठों की मार, रंगों की फुहार और प्रेम की परंपरा बरसाना की लठामार होली ने एक बार फिर साबित कर दिया कि यह केवल उत्सव नहीं, बल्कि ब्रज की सांस्कृतिक पहचान है। श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए पुलिस-प्रशासन मुस्तैद रहा। सीसीटीवी कंट्रोल रूम, वॉचटावर और ड्रोन के जरिए निगरानी की गई। जगह-जगह पुलिस अधिकारियों और मजिस्ट्रेटों की ड्यूटी लगाई गई, जिससे मेला सकुशल संपन्न हुआ।